किसानों की लागत व समय बचाएगा कृषि रोबोट
इगलास के युवकों ने तैयार की रिमोट संचालित अनौखी मशीन
योगेश कौशिक, इगलास (अलीगढ )
किसानों को खेत में कार्य करने के लिए तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बड़ी समस्या होती है फसल को तमाम बीमारियों से बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव करने की। समय पर मजदूर न मिले तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। किसानों की इसी समस्या को देखते हुए जिला मुख्यालय से 25 किमी. दूर इगलास के दो युवकों ने रिमोट संचालित मशीन तैयार की है इसे कृषि रोबोट नाम दिया है। यह मशीन किसानों की कृषि पर होने वाली लागत को कम करेगी और समय की भी बचत होगी। मशीन किसानों के सामने खड़ी होने वाली चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी।
कस्बा के हिमांशु सिंह एमबीए व एग्रीकल्चर डिप्लोमा पास हैं। पिता के साथ फर्टिलाइजर की दुकान संभालते हैं। इन्होंने किसानों के सामने खेती के दौरान आने वाली चुनौतियों को समझा और उसका हल निकालने के प्रयास में जुट गए। इस कार्य में उन्होंने मित्र प्रशांत की मदद ली। प्रशांत बीबीए पास हैं और फोटो ग्राफी का काम करते हैं। दोनों ने मिलकर जापानी टेक्नोलाजी पर आधारित मशीन (कृषि रोबोट) तैयार किया है।रिमोट के माध्यम से बैटरी से चलने वाले इस रोबोट से किसानों का कठिन परिश्रम की आवश्यकता नहीं होगी और जोखिम भी कम होगा। खेत पर दूर बैठकर ही स्प्रे के साथ नराई, गुड़ाईव बीज बो सकते हैं। रोबोट लोहे के चौकोरव गोल पाइपों से बना है। इसका वजन 65 किलोग्राम, चौड़ाई 54 इंच, लंबाई 42 इंच व ऊंचाई 60 इंच है।
ये है क्षमता
प्रशांत ने बताया कि इसे बनाने में आठ माह का समय लगा। अभी एक कृषि रोबोट तैयार करने में एक लाख का खर्च आया है। इसे बड़े पैमाने पर बनाने में 40 फीसद लागत कम की जा सकती है। इसे इस तरह डिजाइन किया है कि वह 300 किलो का भार झेल सकता है।क्यारियों के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है। दुर्गम स्थान पर भी प्रयोग कर सकते हैं। किसान के अनुकूल होने के साथ पर्यावरण के भी अनुकूल है, इससे कोई प्रदूषण नहीं होगा। आगे और पीछे की दिशा में चलने के साथ 360 डिग्री का चक्कर लगा सकता है। दो किमी. दूर से आपरेट किया जा सकता है। एक बार चार्ज करके 100 बीघा में स्प्रे कर सकते हैं।
ऐसे करता है कार्य
इसमें में लगी पंप रिमोट से सिग्नल मिलने पर टैंक से घोल को प्रेशर के साथ स्प्रे करता है। नोजल दोनों साइड 12 फीट व सामने पांच फीट तक स्प्रे करते हैं। किसान रिमोट में लगी स्क्रीन पर दूर बैठकर कैमरे के माध्यम से स्थिति की जानकारी कर सकता है।
ये होगी बचत
एक एकड़ फसल में स्प्रे करने के लिए 150 लीटर घोल की आवश्यकता होती है और दो घंटे का समय लगता है। इससे 100 लीटर घोल के साथ 15 मिनट में स्प्रे हो जाएगा। खेत में अंदर जाने की आवश्यकता नहीं होगी और आपरेटर के स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होगा। उर्वरक, कीटनाशक और समय की बर्बादी कम होगी। इसका उपयोग उर्वरक, कीटनाशकों और कवकनाशी के छिड़काव के साथ बीज बोने व नराई, गुड़ाई में कर सकते हैं। किसान को स्प्रे करने के लिए श्रमिक की जरूरत नहीं होगी।

इससे बनी है मशीन
पहिये – चार
मोटर- दो
डीसी पंप – चार
सर्किट बोर्ड – एक
बैटरी – एक 24 वोल्ट, 50 एएच
नियंत्रक प्लेट – एक
प्लास्टिक टैंक – एक
स्प्रे नोजल – छह
कैमरा – एक 360 डिग्री, नाइट मोड