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बिटिश राज के कानून के स्थान पर स्वदेशी कानून किया गया है लागू

इगलास। बिटिश राज के कानून के स्थान पर स्वदेशी कानून लागू किया जा रहा है। न्याय प्रणाली को सुगम बनाने के लिए दंड के स्थान पर न्याय शब्द पर ध्यान केंद्रित किया गया। आपराधिक कानून 511 से घटाकर 358 कर दिए गए हैं। महिलाओं बच्चों के विरुद्ध व्यवस्था की गई है। झूठे मामले आने पर नए कानून में सख्ती है। जांच में प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया गया है। जिसमें डिजिटल साक्ष्य को स्वीकार्यता दी गई है। भारतीय साक्ष्य में धारा 167 के स्थान पर 170 कर दिया गया है। सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को आजीवन कारावास या फांसी के साथ ही छीना झपटी व आतंकवादी घटनाओं के संबंध में न्याय की व्यवस्था है। तीन वर्ष से कम सजा वाले प्रकरणों में गिरफ्तारी उच्चाधिकारियों की अनुमति पर ही होगी। एफआईआर 154 सीआरपीसी के स्थान पर 163 के तहत होगी। यह बातें एडीजी आगरा जोन ने यहां कोतवाली में आयोजित नए कानून की पाठ्शाला बताई। उन्होंने कहा कि समय के साथ देश बदल रहा है। इसीलिए कानून में बदलाव की आवश्यकता थी। बदलाव करते हुए पीडित को जबाब देही व न्याय की सुनिश्चिता तय की गई है। नए कानून की जानकारी समाज तक पहुंचाने का दायित्व सभी का है। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वदेशी कानून लागू करने के आदेश कर दिए हैं।

मिशन जाग्रति से आई अपराध में कमी

कस्बा के श्री शिवदान सिंह इंटर कालेज में मिशन जाग्रति कार्यक्रम में अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। यहां एडीजी ने साइबर हिंसा इंटरनेट मीडिया को लेकर जागरूक किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता व शिक्षकों का दायित्व है कि वह बच्चों पर ध्यान दें। साइबर क्राइम के तहत खाते से पैसा कटने पर 1930 पर तत्काल कॉल करें। किसी अंजान एप को प्ले स्टोर से डाउनलोड न करें। यात्रा करते समय वाहन की जानकारी स्वजन के साथ साझा करते रहें। मिशन जाग्रति एक नवंबर से प्रारंभ हुआ और इसको गांवों तक ले जाया गया। इससे महिला संबंधी अपराध में कमी आई हैं। माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे अपने पाल्यों से निरंतर परिचर्चा करें और उनकी समस्याओं पर संवाद स्थापित करके जागरूक करें। लड़कों का नैतिक दायित्व है कि वह बहन, बेटियों का सम्मान करें, जिससे अच्छे समाज की स्थापना हो। विकसित देश के निर्माण के लिए हम अपने दायित्व का निर्वहन करके अधिकारों की बात करें। पुलिस के दूत बन कर समाज मे काम करेंगे तब क्रांतिकारी परिवर्तन होगा।

इंटरनेट मीडिया से आया व्यवहार में परिवर्तन

डीआईजी शुलभ माथुर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान मोबाइल का प्रयोग बढ़ा है। बच्चे घर से दूर रहने पर इंटरनेट मीडिया पर एक्टिव हुए हैं। जिससे उनके व्यवहार में परिवर्तन आया है। आज के दौर में आवश्यकता है कि माता-पिता अपने पाल्यों को विश्वास में लेकर उनको इंटरनेट मीडिया के दुष्परिणाम बताएं।

पर्दे के व असल हीरो में करें अंतर

एसएसपी संजीव सुमन ने कहा कि नए कानून को लागू करने के लिए पांच वर्ष का समय दिया गया है। दो तीन माह तक कुछ परेशानी होंगी। 18 वर्ष से कम उम्र के लिए महिला-पुरुषों के लिए समान रूप से कानून लागू होगा। समयबद्ध न्याय प्रणाली होगी। मोबाइल के दौर में नई व पुरानी पीड़ी के मध्य वैचारिक अंतर आ गया है, जिससे टकराब की स्थितियां होती हैं। नई पीड़ी को असल हीरो व पर्दे के हीरो में अंतर समझना चाहिए। सीओ अतरौली अकमल ने फोन के उपयोग करने पर सजग रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर एसपी ग्रामीण पलाश बंसल, एसपी यातायात, प्रधानाचार्य केपी सिंह, आदि थे। संचालक डा. संजय कुमार ने किया।

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