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अलीगढ़ में ‘आधी आबादी’ ने भरी आर्थिक उड़ान, 92 हजार महिलाएं बनीं लखपति दीदी

डीएम की नई रणनीति, अब मल्टी-टास्किंग से सशक्त होंगी महिलाएं

अलीगढ़। जनपद की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। मंगलवार को विकास भवन सभागार में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की महत्वपूर्ण बैठक में जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने घोषणा की कि अलीगढ़ में अब तक 92,060 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। यह आंकड़ा न केवल जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का सीधा प्रमाण भी है।

अब पारंपरिक कार्यों से आगे बढ़ेंगी महिलाएं

जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने बैठक को संबोधित करते हुए महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए एक नई और प्रभावी रणनीति पेश की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अब केवल सिलाई-कढ़ाई या मोमबत्ती बनाने जैसे एक ही पारंपरिक कार्य तक सीमित नहीं रखा जाएगा। शासन की मंशा है कि हर महिला को ‘मल्टी-टास्किंग’ बनाया जाए। इसके तहत अब स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एक साथ कई आजीविका गतिविधियों जैसे डेयरी, आधुनिक कृषि तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण (अचार, मुरब्बा, मसाला उद्योग), हस्तशिल्प और स्थानीय लघु उद्योगों से जोड़ा जाएगा। डीएम ने निर्देश दिए कि यदि कोई महिला एक कार्य में व्यस्त है, तो उसे खाली समय में दूसरी गतिविधि से आय अर्जित करने के लिए प्रेरित किया जाए ताकि उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से ऊपर सुनिश्चित हो सके।

ब्लॉक मिशन मैनेजरों को ‘वीडियो ट्रेनिंग’ और पोर्टल अपडेट के निर्देश

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न विभागों द्वारा संचालित लाभकारी योजनाओं के छोटे-छोटे ‘इंफॉर्मेटिव वीडियो’ तैयार किए जाएं, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आसानी से प्रशिक्षित किया जा सके। साथ ही, ब्लॉक मिशन मैनेजरों को सख्त हिदायत दी गई कि समूह की महिलाओं द्वारा की जा रही हर गतिविधि और उनकी वास्तविक आय का डेटा नियमित रूप से सरकारी पोर्टल पर अपडेट किया जाए। डीएम ने प्रत्येक विकास खंड से एक ऐसी ‘लखपति दीदी’ की सूची मांगी है जिसकी सफलता की कहानी अन्य महिलाओं के लिए नजीर बन सके।

हर दिन जुड़ रहीं 700 नई महिलाएं

उपायुक्त राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन मंजू त्रिपाठी ने प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि जिले में महिला समूहों के गठन में अभूतपूर्व तेजी आई है। जनपद में पहले से ही 16,811 समूह कार्य कर रहे थे, लेकिन पिछले चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) के भीतर ही 2,538 नए समूहों का गठन कर 19,349 नई महिलाओं को मिशन से जोड़ा गया है। वर्तमान में जिले में प्रतिदिन औसतन 700 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा बन रही हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 92,060 महिलाएं सफलतापूर्वक अपनी आय बढ़ाकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

बैठक में ये रहे मौजूद 

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार ने विकास कार्यों की समीक्षा की। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी, परियोजना निदेशक भाल चंद त्रिपाठी, जिला विकास अधिकारी आलोक आर्य सहित समस्त खंड विकास अधिकारी एवं एडीओ ग्राम्य विकास मौजूद रहे।

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