लेखनी की शुचिता और निर्भीकता ही ग्रामीण पत्रकारिता की वास्तविक पूंजी: राज नारायण सिंह
इगलास में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के संस्थापक स्व. बाबू बालेश्वर लाल की 39वीं पुण्यतिथि गरिमापूर्ण से मनाई गई
अलीगढ़। ग्रामीण पत्रकारिता को भारतीय लोकतंत्र में एक विशिष्ट पहचान दिलाने वाले और ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के संस्थापक स्वर्गीय बाबू बालेश्वर लाल की 39वीं पुण्यतिथि जनपद में अत्यंत गरिमापूर्ण और भव्य रूप में मनाई गई। संगठन के निर्देशानुसार इस पावन दिवस को पूरे प्रदेश की तरह यहाँ भी ‘ग्रामीण पत्रकारिता दिवस’ के रूप में आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर इगलास स्थित प्रकाश कान्वेंट स्कूल के प्रांगण में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा, विचार गोष्ठी एवं वरिष्ठ पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें जिलेभर से आए सैकड़ों कलमकारों ने सहभागिता कर अपनी वैचारिक एकजुटता का परिचय दिया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथियों एवं प्रांतीय पदाधिकारियों द्वारा ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत उपस्थित समस्त पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों ने संगठन के मार्गदर्शक स्व. बालेश्वर लाल के तैलचित्र पर बारी-बारी से पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में पधारे सभी आगंतुक पत्रकारों का स्वागत करते हुए विद्यालय के प्रबंधक चौधरी श्यामबाबू सिंह ने सभी को अंगवस्त्र भेंट कर आत्मीय सम्मान किया।
झोपड़ियों और खेतों में बसते वास्तविक भारत की बुलंद आवाज है ग्रामीण पत्रकारिता : राजनारायण
विचार गोष्ठी के मुख्य वक्ता और एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष राज नारायण सिंह ने अपने अत्यंत प्रभावशाली, ओजस्वी और विचारोत्तेजक संबोधन से सभागार में उपस्थित सभी पत्रकारों में राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यबोध की नई ऊर्जा का संचार कर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र का भव्य और गौरवशाली चौथा स्तंभ ग्रामीण पत्रकारिता के सुदृढ़ आधार के बिना पूरी तरह अधूरा और निराधार है। स्वर्गीय बाबू बालेश्वर लाल जी केवल एक व्यक्ति या संपादक नहीं थे, बल्कि वे अपने आप में पत्रकारिता की एक जीवंत संस्था और वैचारिक आंदोलन थे। उन्होंने उस दुरूह और कठिन दौर में ग्रामीण पत्रकारिता को एक नई चेतना और क्रांतिकारी दिशा प्रदान की, जब ग्रामीण अंचलों की मूलभूत समस्याओं, किसानों के दर्द और शोषितों की आवाज़ को मुख्यधारा के मीडिया (नेशनल मीडिया) में स्थान मिलना लगभग नामुमकिन था। उन्होंने कहा कि बालेश्वर लाल जी का स्पष्ट मानना था कि वास्तविक भारत झोपड़ियों और खेतों में रहता है। इसीलिए उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े, हाशिए के व्यक्ति की दबी हुई आवाज को अपनी कलम की ताकत से शासन-प्रशासन के बंद गलियारों तक मजबूती से पहुँचाने का भगीरथ कार्य किया। पत्रकारिता के इस पावन जगत में उनका यह अद्वितीय, निष्पक्ष और निडर योगदान आने वाली कई भावी पीढ़ियों के लिए सदैव एक प्रकाश स्तंभ, प्रेरणास्रोत और स्मरणीय रहेगा। आज के युग में जब पत्रकारिता के मूल्य बदल रहे हैं, तब उनकी लेखनी की शुचिता, निष्पक्षता और सिद्धांतों से समझौता न करने का संकल्प ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
संगठन एकजुटता की अनूठी मिसाल: देवेंद्र पाराशर
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र पाराशर ने संगठन की आंतरिक शक्ति और एकजुटता पर विशेष बल देते हुए कहा कि बाबू बालेश्वर लाल ने केवल एक वैचारिक संगठन की स्थापना नहीं की थी, बल्कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में बिखरे पत्रकारों को आपसी स्नेह और विश्वास के एक अटूट पारिवारिक सूत्र में पिरोया था। आज यही कारण है कि यह संगठन अपने हर साथी के सुख-दुख, मान-सम्मान और सुरक्षा के लिए सदैव 24 घंटे कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहता है।
ग्रामीण पत्रकारिता ही देश की असली और प्रामाणिक पत्रकारिता का चेहरा है : योगेश कौशिक
कार्यक्रम का अत्यंत सफल संचालन कर रहे मंडल महामंत्री योगेश कौशिक ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ग्रामीण पत्रकारिता ही देश की असली और प्रामाणिक पत्रकारिता का चेहरा है, क्योंकि भारत की वास्तविक धड़कन और आत्मा महानगरों की चकाचौंध में नहीं, बल्कि देश के सुदूर गांवों, खेतों और पगडंडियों की मिट्टी में बसती है। आज के व्यावसायिक और टीआरपी-प्रधान दौर में ग्रामीण पत्रकार बिना किसी चकाचौंध के बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े शोषितों, वंचितों और किसानों की दबी हुई आवाज को शासन-प्रशासन तक निष्पक्षता से पहुँचाते हैं। यही धरातलीय और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता लोकतंत्र को वास्तविक मजबूती प्रदान करती है।
सुरक्षात्मक चुनौतियाँ और पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर मंथन
गोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए जिला उपाध्यक्ष हृदेश चौधरी ने वर्तमान परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के इस आधुनिक और संक्रमण काल में ग्रामीण पत्रकारों के सामने फील्ड में काम करते समय कई प्रकार की विसंगतियां, आर्थिक विषमताएं और गंभीर सुरक्षात्मक चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी हमें विचलित हुए बिना अपनी लेखनी की वास्तविक ताकत को पहचानना होगा और केवल जनसरोकारों, विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मुद्दों को ही प्रमुखता से उठाना होगा। वहीं, जिला उपाध्यक्ष सत्या पंडित ने शुचिता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी पत्रकार के जीवन में उसकी विश्वसनीयता ही उसकी सबसे बड़ी और अनमोल पूंजी होती है, जिसे हमें किसी भी प्रलोभन या दबाव में आकर खोने नहीं देना है। जिला संप्रेक्षक एमएस सैफी ने कहा कि बाबू बालेश्वर लाल ने ग्रामीण पत्रकारों को एक ऐसा सशक्त और निर्भीक मंच प्रदान किया, जहां से वे बिना किसी प्रशासनिक भय या संकोच के समाज की कमियों को उजागर कर सकें। उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग और विचार आज के वैश्विक और डिजिटल समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक और मार्गदर्शक हो गए हैं। इगलास तहसील अध्यक्ष सुनील गुप्ता ने सुदूर क्षेत्रों से आए सभी अतिथियों, अधिकारियों और पत्रकार साथियों का सहृदय आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इगलास तहसील की पूरी कार्यकारिणी संगठन के सिद्धांतों के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित और निष्ठावान है।
वरिष्ठ कलमकारों को ‘स्व. बालेश्वर लाल पत्रकारिता सम्मान 2026’
वैचारिक गोष्ठी के अंतिम और सबसे गौरवमयी चरण में पत्रकारिता के क्षेत्र में जीवनपर्यंत उल्लेखनीय, पूर्णतः निष्पक्ष, सत्यनिष्ठ और उत्कृष्ट योगदान देने के लिए अलीगढ़ जनपद के दो सबसे वरिष्ठ और मूर्धन्य कलमकारों को मंच पर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार शिवओम शर्मा एवं वरिष्ठ पत्रकार इंद्रजीत प्रेमी को मंचासीन मुख्य अतिथियों द्वारा अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और सम्मान पत्र भेंट कर ‘स्व. बालेश्वर लाल पत्रकारिता सम्मान 2026’ की मानद उपाधि से नवाजा गया। कार्यक्रम की व्यवस्था में नरेंद्र शर्मा, नरेंद्र गुप्ता, विशाल उपाध्याय, सचिन प्रेमी, आदेश चौधरी का योगदान रहा।
कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
इस अवसर पर मंडल महामंत्री विवेक शर्मा, गौरव चौधरी, कुलदीप शर्मा, विष्णु शर्मा, मोहित शर्मा, पंकज शर्मा, पंकज बघेल, उमाशंकर शर्मा, सोनू शर्मा, योगेश शर्मा, योगेश उपाध्याय, संजय भारद्वाज, बृजेश पाठक, नरेंद्र गुप्ता, राजेश अग्रवाल, संजय खान, आकाश शर्मा, प्रवेंद्र शर्मा आदि उपस्थित रहे।