कलश यात्रा से बिखरी धार्मिक छठा, 1008 महिलाएं कलश यात्रा में हुई शामिल
- हरिदासपुर स्थित गल्फार कंपनी के मैदान में प्रारंभ हुआ 108 कुंडीय महायज्ञ व भागवत कथा
लोधा। क्षेत्र के गांव हरिदासपुर स्थित गल्फार कंपनी के मैदान में मंगलवार से 108 कुंडीय महायज्ञ व श्रीमद् भागवत कथा का भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हो गया।
खेरेश्वर मंदिर से शुरू हुई कलश यात्रा
खेरेश्वर मंदिर प्रांगण से निकाली गई कलश यात्रा में 1008 महिलाएं पीतावंर वस्त्र धारण कर सिर पर कलश रखकर चल रही थी। वहीं बैंड बाजे व डीजे पर चल रहे भजनों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु झूमते-नाचने चल रहे थे। जिससे पूरे क्षेत्र धार्मिक छठा बिखरती हुई नजर आई। कलश यात्रा का भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। वहीं श्रद्धालुओं ने विभिन्न स्थानों पर शीलत जल के प्याऊ लगाकर कर भी यात्रा में शामिल लोगों की सेवा की। कलश यात्रा ने कथा स्थल पर पहुंच का विश्राम लिया।
धार्मिक आयोजनों से मिलती है समाज को नई चेतना
कलश यात्रा का शुभारंभ वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज शर्मा व सीमा उपाध्याय ने हरि झंडी दिखाकर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों से न केवल मन को शांति मिलती है बल्कि समाज मे एक नई चेतना के साथ ईश्र्वर के प्रति आस्था भी बढ़ती है। ऐसे कार्यक्रम आपसी प्रेम व भाईचारे को कायम रखने का भी माध्यम होते हैं इसलिए इनका अधिकाधिक आयोजन होना चाहिए। नीजर शर्मा ने कहा कि हरिगढ़ अभियान को जन समर्थन मिल रहा है। यदि सभी का सहयोग मिला तो जल्द ही शहर हरिगढ़ के नाम से ही जाना जाएगा।
विश्व में भागवत कथा सबसे श्रेष्ठ
कथा के पहले दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने भागवत कथा के महत्व एवं फल पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से ईश्र्वर की भक्ति की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि विश्व में सभी कथाओं में श्रीमद् भागवत कथा को श्रेष्ठ माना गया है। जिस स्थान पर इस कथा का आयोजन होता है, वह स्थान उस समय के लिए तीर्थ स्थल बन जाता है। भागवत कथा को सुनने व इसका आयोजन कराने का सौभाग्य भी प्रभु प्रेमियों को ही मिलता है। इस कथा का श्रवण करने से पापों से मुक्ति मिलती है। भगवान के चरणों में जितना समय बीत जाए उतना बीत जाए उतना अच्छा है। इस संसार में एक-एक पल बहुत कीमती है। जो बीत गया सो बीत गया। इसलिए जीवन को व्यर्थ में बर्बाद नहीं करना चाहिए। अपने जीवन को भगवान के साथ और भगवान के सत्संग में ही व्यतीत करना चाहिए। आयोजन में धनंजय पंडित परीक्षित बांके बिहारी आचार्य भरत तिवारी आचार्य कृष्ण गोपाल, आचार्य हिमांशु शास्त्री, आचार्य वेद प्रकाश शर्मा, दीपक भारद्वाज, मोहन शर्मा आशु पंडित युवराज रावत आदि लोग मौजूद थे। 