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बासमती चावल की शुद्धता के लिए जिले में 11 कीटनाशक रसायनों पर रोक

अलीगढ़।  बासमती चावल में कीटनाशक अवशेषों के खतरे को देखते हुए जिले में कुछ रसायनों के प्रयोग, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से 60 दिनों की अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। प्रदेश स्तर से जारी अधिसूचना के अंतर्गत ट्राईसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपाइरीफास, हेक्साकोनोजोल, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफास, इमिडाक्लोप्रिड, कार्वाेफ्यूरॉन एवं कार्वेण्डाजिम जैसे कीटनाशक रसायनों के किसी भी प्रकार के फार्मूलेशन का प्रयोग बासमती चावल में नहीं किया जाएगा।

उद्देश्य: जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि इन रसायनों के उपयोग से चावल में अधिकतम अवशेष स्तर (एमआरएल) बढ़ जाता है, जिससे यूरोपीय संघ, अमेरिका और खाड़ी देशों जैसे बड़े आयातक देशों में निर्यात प्रभावित होता है। वर्ष 2020-21 की तुलना में 2021-22 में बासमती चावल के निर्यात में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। एपीडा (भारत सरकार) एवं सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ ने भी गुणवत्तायुक्त और बाधा-मुक्त निर्यात सुनिश्चित करने के लिए इस पाबंदी का समर्थन किया है और विकल्प स्वरूप एकीकृत रोग प्रबंधन (आईडीएम) पद्धति अपनाने की संस्तुति की है।

किसानों से अपील: जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र कुमार चौधरी ने जिले के समस्त कृषक भाइयों से अपील की है कि बासमती चावल की खेती में उपरोक्त प्रतिबंधित कीटनाशकों का प्रयोग कतई न करें। यह कदम प्रदेश की गौरवशाली बासमती उपज की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा बनाए रखने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसान भाइयों के लिए महत्वपूर्ण सूचना: बासमती चावल की फसल में ट्राईसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपाइरीफास, हेक्साकोनोजोल, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफास, इमिडाक्लोप्रिड, कार्वाेफ्यूरॉन एवं कार्वेण्डाजिम जैसे कीटनाशकों का 60 दिनों तक प्रयोग, बिक्री व वितरण प्रतिबंधित है।

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