वसंतोत्सव का रंगारंग आयोजन, रासलीला व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
इगलास। मंगलायतन विश्वविद्यालय के दृश्य एवं कला विभाग द्वारा वसंत पंचमी के पावन अवसर पर वसंतोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन के सहयोग से आयोजित हुआ। जिसमें विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन किया। इस दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाइ छह द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती भी पराक्रम दिवस के रूप में मनाई गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलित करके व नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि अर्पित करके किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रासलीला ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। मंचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की लीलाओं का जीवंत चित्रण किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इसके अतिरिक्त अन्य सांस्कृतिक नृत्य, संगीत एवं नाट्य प्रस्तुतियों ने भी आयोजन को यादगार बना दिया।
कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने कहा कि भारत का इतिहास कभी गुलामी का नहीं रहा, बल्कि यह सतत संघर्ष, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की चेतना का इतिहास है। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए युवाओं से देशभक्ति, त्याग और समर्पण के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। कुलसचिव ब्रिगेडियर डा. समरवीर सिंह ने कहा कि हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना आज पूरी दुनिया को मार्गदर्शन दे रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाला समय भारत का है और युवा पीढ़ी देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
गीता शोध संस्थान के निदेशक दिनेश खन्ना ने वसंत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्थान की गतिविधियों और भारतीय दर्शन के प्रचार-प्रसार के प्रयासों के बारे में जानकारी साझा की। डीन एकेडमिक प्रो. राजीव शर्मा ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ भारतीय परंपराओं से जुड़ाव को मजबूत करते हैं। कला संकाय की विभागाध्यक्ष डा. पूनम रानी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर गीता शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, मंविवि के प्रो. आरके शर्मा, प्रो. दिनेश पांडे, प्रो. सौरभ कुमार, प्रो. प्रमोद कुमार, प्रो. जितेंद्र सिंह, मयंक प्रताप सिंह, अजय राठौर आदि मौजूद रहे।