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श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता का प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु

इगलास। कस्बा स्थित ओम सेलिब्रेशन गेस्ट हाउस में मां भगवती आश्रय सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथा व्यास कार्ष्णिमयंक उपाध्याय ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्चा मित्र वही होता है जो अपने मित्र को सर्वस्व अर्पित कर दे, लेकिन बदले में कोई अपेक्षा नरखे। कथा व्यास ने कहा कि सुदामा निष्काम मित्रता का आदर्श उदाहरण हैं। उन्होंने कभी भी भगवान श्रीकृष्ण से कोई कामना नहीं की, जबकि श्रीकृष्ण ने उन्हें बिना कहे ही सब कुछ दे दिया। यह बताता है कि जब हमारा प्रेम परमात्मा से निष्काम हो जाता है, तो वे भी हमें बिना मांगे सब कुछ दे देते हैं। कथा में आगे उन्होंने बताया कि मन और बुद्धि में निरंतर संघर्ष चलता है। मन नित नए स्वाद चाहता है जबकि बुद्धि जीव का कल्याण चाहती है। जो इनमें विजयी होता है, उसी के अनुसार जीव की गति निर्धारित होती है। कथा को विश्राम देते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा को श्रद्धा और विश्वास के साथ सुनने मात्र से मोक्ष की प्राप्ति संभव है। राजा परीक्षित का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने सुखदेव मुनि से कथा श्रवण कर तक्षकसर्प द्वारा मृत्यु के भय से मुक्ति पाई और जन्म-मृत्यु के बंधन से छूट गए।

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