स्वतंत्रता संग्राम में काकोरी कांड की घटना का है विशेष महत्व
इगलास। परोपकार सामाजिक सेवा संस्था द्वारा गांव तोछीगढ़ में काकोरी कांड की 99वीं वर्षगांठ पर बलिदानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वहीं, स्वतंत्रता संग्राम में देश के लिए अहम योगदान देने वाले क्रांतिकारियों का स्मरण किया। अध्यक्ष जतन चौधरी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों द्वारा ब्रिटिश राज के विरुद्ध भयंकर युद्ध छेड़ने की ईच्छा से सशस्त्र क्रांति का मार्ग अपनाया। सशस्त्र क्रांति के लिए हथियारों की जरूरत को पूरा करने के लिए ब्रिटिश सरकार का ही खजाना लूटने का निर्णय लिया गया। नौ अगस्त 1925 को हिंदुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के 10 सदस्यों ने पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में शाहजहांपुर के काकोरी स्टेशन के पास सहारनपुर-लखनऊ पेसेंजर ट्रैन से सरकारी खजाना लूटा था। इस घटना से ब्रिटिश हुकूमत तिलमिला उठी थी। ब्रिटिश सरकार ने पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी पर गंभीर आरोप लगाते हुए मृत्युदण्ड की सजा सुनाई। अन्य क्रांतिकारियों को उम्रकैद या कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। स्वतंत्रता संग्राम में काकोरी कांड की घटना का विशेष महत्व है। इस अवसर पर बीकेश, केशव, भुवनेश, अतुल, अजय, सौरभ, मनोज, गोविंद, सूरज, साधना थे।