बाबा का सत्संग चीत्कार में बदला, भगदड़ में 116 लोगों की हुई मौत
हाथरस। सिकंदराराऊ कस्बा के पास एटा रोड स्थित गांव फुलरई में सत्संग के बाद भगदड़ मच गई। हादसे में अभी तक 116 लोगों की मौत हो गई। जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए। जिन्हें हाथरस, एटा व अलीगढ़ के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मरने वालों में अधिकतर महिलाएं व बच्चे शामिल हैं। हादसे में मौतों की संख्या अभी और भी बढ़ सकती है। सत्संग के समापन के बाद कथावाचक भोले बाबा का काफिला निकालने के लिए भीड़ को एक हिस्से से रोका गया। इसी दौरान भगदड़ मच गई। लोग एक के बाद एक करके कार्यक्रम स्थल के पास छह फिट गहरे गड्डानुमा खेत में भरे पानी के दलदल में गिरते चले गए। इतनी बड़ी घटना को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी समेत तमाम आलाधिकारियों को मौके पर भेजा है, वहीं 24 घंटे अंदर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं।
लाखों की संख्या में प्रवचन सुनने पहुंचे थे लोग
गांव फुलरई में एटा रोड पर मंगलवार को सद्भावना समिति की ओर से भोले बाबा का सत्संग का आयोजन किया। जिसके लिए आयोजक व बाबा के अनुयाई साफ-सफाई करने में जुटे हुए थे। इस सत्संग में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा समेत कई प्रांतों लोग बाबा के प्रवचन सुनने के लिए पहुंचे थे। दोपहर में करीब एक बचे सत्संग समाप्त होते ही वहां से लोग निकलने शुरू हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाबा का काफिला निकालने के लिए भीड़ को एक हिस्से से रोक दिया गया। इस बीच अनुयाई बाबा के काफिले के पीछे उनकी चरण रज लेने व अंतिम दर्शन करने के लिए दौड़ पड़े। इसी दौरान भगदड़ मच गई। कार्यक्रम स्थल की दूसरी तरफ रोड से करीब छह फीट नीेचे खेत की तरफ गड्ढानुमा खेता का किनारा था। बारिश की वजह से वहां पानी भरा हुआ था। जिसके कारण खेत की मिट्टी दलदल जैसी हो गई। भगदड़ में लोग इसमें एक के ऊपर एक गिरते चले गए और आगे नहीं बढ़ सके। जिससे बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई। वहीं कुछ लोगों की भगदड़ के दौरान पैरों के नीचे कुचलने से मौत हो गई।
चीत्कार में बदला सत्संग स्थल
भगदड़ के बाद लोग इधर-उधर गिरने लगे। देखते ही देखते कार्यक्रम स्थल लोगों में मदद को चीख-पुकार मचने लगी। लोग अपने परिजनों को इधर-उधर तलाश करने लगे। लोग गंभीर हालत में घायलों व शवों को बस, टेंपो व अन्य वाहनों से सिकंदराराऊ, एटा, हाथरस व अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे। हादसे के बाद अस्पतालों में हालात भयावह हो गए। हादसे के बाद इतने घायल अस्पतालों में पहुंचे की वह फुल हो गए। अस्पतालों के बाहर कुछ लोग तड़फते हुए नजर आए।
प्रशासन का नहीं मिला कोई सहयोग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर कोई भी प्रशासनिक उच्च अधिकारी मौजूद नहीं था और न ही पर्याप्त मात्र में पुलिस फोर्स तैनात था। हादसे के बाद लोग मदद को चीख-पुकार करते रहे, लेकिन उनकी मदद को कोई भी प्रशासनिक अधिकारी व आयोजक नहीं आए। वह स्वयं ही अपने परिजनों व परिचितों कों इलाज के लिए टेंपो आदि की मदद से अस्पताल लेकर पहुंचे।
कौन है नारायण साकार हरि (भोले बाबा)
भोले बाबा जनपद कासगंज के पटियाली के बहादुर नगर के रहने वाले हैं। इनका मुख्य नाम एसपी सिंह है। बाबा के बारे में कुछ लोग कहते है कि उन्होंने 17 वर्ष पूर्व यूपी पुलिस में दारोगा के पद से नौकरी छोड़ी थी तो कुछ लोग इन्हें आईबी से जुड़ा भी बताते हैं। बताया गया है कि एसपी सिंह (भोले बाबा) ने नौकरी के दौरान ही वे मानव धर्म के उपदेश देना शुरू कर दिया था। बाबा आम साधु-संतों की तरह गेरुआ वस्त्र नहीं पहनता। वह महंगे गॉगल, सफेद पैंटशर्ट पहनकर किसी फिल्मी हीरो जैसा नजर आते है। अपने प्रवचनों में बाबा पाखंड का विरोध भी करता है। चूंकि बाबा के शिष्यों में बड़ी संख्या में समाज के हाशिए वाले, गरीब, दलित, दबे-कुचले लोग शामिल हैं। उन्हें बाबा का पहनावा और यह रूप बड़ा लुभाता है। बाबा के अनुयाई उन्हें साक्षात हरि अर्थात विष्णु का अवतार मानते हैं।
बाबा की अपनी फौज संभालती है ट्रैफिक का मोर्चा
साकार हरि की अपनी फौज है। हल्के गुलाबी रंग के पैंट-शर्ट, पुलिस बेल्ट, हाथ में लाठी और सीटी लेकर हजारों की संख्या में इनके स्वयंसेवक कार्यक्रम स्थल और सड़कों पर चप्पे-चप्पे पर तैनात रहते हैं। एक नजर में देखने पर यह होमगार्ड जैसा कोई अनुशासित बल दिखाई देता है। बड़ी संख्या में महिला स्वयंसेवक भी तैनात रहती हैं। इनकी भी वर्दी होती है। बाबा की यह लंबी-चौड़ी फौज ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर, पानी और दूसरे इंतजाम देखती है। कार्यक्रम स्थलों पर बाबा की फौज का यह गणवेश आप कई काउंटरों से बिकते देख सकते हैं। कहा जाता है इसे खरीदने की अनुमति उन्हीं लोगों की होती है जिसे बाबा चाहते हैं। कई बार यह स्वयंसेवक आम आदमी को कार्यक्रम स्थल के पास से गुजरने से रोक भी देते हैं। प्रशासन भी इन स्वयंसेवकों के भरोसे शायद उतना ध्यान नहीं देता जितना उसे देना चाहिए। शायद प्रशासन की उपेक्षा और बाबा के स्वयंसेवकों पर जरूरत से ज्यादा भरोसे ने हाथरस जैसे बड़े हादसे को जन्म दिया है।
मीडिया से भी दूरी
बाबा के सत्संगों में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। बाबा के शिष्य अपनी ही मस्ती में रहते हैं। यही वजह है कि मीडिया से भी ये लोग दूरी बनाते हैं। दरअसल, बाबा के सत्संग के तौर-तरीके चूंकि आम संतों से अलग होते हैं लिहाजा ये लोग नहीं चाहते कि इस पर किसी प्रकार की टीका-टिप्पणी हो।
लाशों के ढेर देखकर पुलिसकर्मी को आया हार्ट अटैक, मौत
एटा में मेडिकल कॉलेज में लाशों का ढेर देखकर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को हार्ट अटैक से मौत हो गई। अलीगढ़ के थाना बन्नादेवी के सिद्धार्थनगर निवासी 30 वर्षीय रजनेश की क्वीआरटी आवागढ़ में तैनाती थी। सिकंदराराऊ हादसे को लेकर रजनेश को मेडिकल कॉलेज में आपात ड्यूटी के लिए बुलाया गया था। लाशों के ढ़ेर देखकर उन्हें हार्ट अटैक आ गया। साथी पुलिसकर्मी उसे डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन तब तक उनकी मौत हो गई।
DM ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
हाथरस की घटना के बाद जिलाधिकारी द्वारा आम लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाईन 05722227041 तथा 05722227042 जारी किये हैं।
मुख्यमंत्री ने आर्थिक सहायता देने के दिए निर्देश
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ घटनाक्रम की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख तथा घायलों को 50-50 हजार की आर्थिक सहायता देने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा दो मंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी को मुख्यमंत्री ने मौके पर भेजा है। एडीजी, आगरा और कमिश्नर, अलीगढ़ के नेतृत्व में टीम गठित कर दुर्घटना के कारणों की जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं मुख्यमंत्री कल बुधवार को घटना स्थल का स्वयं दौरा करेंगे। वहीं घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्पति ने दुख व्यक्त किया है।