एएमयू वीसी बन सकते हैं भाजपा खेमे से एमएलसी, सरकार ने राज्यपाल को भेजा नाम
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मौजूदा वाइस चांसलर प्रोफेसर तारिक मंसूर जल्द ही भाजपा खेमे से एमएलसी बनाए जा सकते हैं। प्रदेश सरकार ने उनके नाम का प्रस्ताव राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को भेजा है। वीसी के साथ ही पांच और नाम सरकार ने राज्यपाल को भेजे हैं।
एएमयू वीसी प्रो. तारिक मंसूर के नाम पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन उनके नाम का प्रस्ताव भेजे जाने के बाद से ही उनका एमएलसी बनना लगभग तय जाना जा रहा है। चर्चा है कि वीसी को संघ से नजदीकियों का फायदा मिलने जा रहा है। भाजपा का यह फैसला देश भर में चर्चाओं का विषय बन गया है। ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा के पास मुस्लिमों में कोई बड़ा चेहरा नहीं था, इसलिए पार्टी उन्हें अपने साथ शामिल कर रही है। इतना ही नहीं लोग इसे 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देख रहे है।
वीसी के साथ कई बड़े नाम सूची में शामिल
योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से विधान परिषद (एमएलसी) के लिए जो नाम भेजे गए हैं। इसमें कई बड़े नाम भी शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार सीएम योगी ने रजनीकांत माहेश्वरी (पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, ब्रज भाजपा), साकेत मिश्रा, लालजी प्रसाद निर्मल (अंबेडकर महासभा), प्रो. तारिक मंसूर (वीसी एएमयू), रामसुभग राजभर (अधिवक्ता, आजमगढ़), हंसराज विश्वकर्मा (भाजपा जिलाध्यक्ष, काशी) के नाम मनोनयन के लिए भेजे हैं।
2017 में बने थे एएमयू वीसी
एएमयू के मौजूदा वाइस चांसलर 2017 में विश्वविद्यालय के वीसी बने थे। वीसी का कार्यकाल 5 साल का होता है, जो कि पिछले वर्ष पूर्ण पूरा हो चुका है। लेकिन उनके कार्यकाल में एक साल और बढ़ा दिया गया। अब जबकि उनका बढ़ाया गया कार्यकाल भी पूरा होने को आ गया है, तब उनको एमएलसी बनाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। इसके पीछे लोगों का मानना है कि संघ के नजदीक होने के कारण उन्हें लाभ दिया जा रहा है। उनके बेटे के निकाह में भी संघ के बडे पदाधिकारी शामिल हुए थे। अगले दिन ही उनके कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया था। सांसद सतीश गौतम ने जिन्ना की तस्वीर एएमयू से हटाने को लेकर वीसी तारिक मंसूर को कई बार कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया, अन्य हिंदूवादी संघठनों के निशाने पर रहे, लेकिन संघ और भाजपा हाईकमान से नजदीकियों के चलते विरोध थम गया। कई अन्य ऐसे भी मौके आए जब उनकी कुर्सी हिलती हुई नजर आई। इस बीच प्रो. तारिक मंसूर ने न केवल मजबूती से डटे रहे, बल्कि सेवानिवृति के बाद भी कार्यकाल बढ़वाने में सफल रहे। इस बार राजनीतिक हसरत को पूरा करने के लिए पिछले काफी समय से वह सक्रिय थे। दिल्ली की नजदीकियों का लाभ उन्हें एमएलसी के पद पर नाम आने पर मिला है।