जन्म, मरण के बंधन से मुक्ति दिलाती है भागवत कथा
-इगलास के गांव चंदफरी में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
इगलास। धर्म, कर्म करने के बाद भी हमें ईश्वर की प्राप्ति इसलिए नहीं होती क्यूंकि हम ईश्वर को पाने वाले मार्ग पर अपने आप को पूर्ण समर्पित किए बिना ही छोड़ देते है। जब तक आप परमात्मा में विलीन नहीं होंगे तब तक आपकी ये जीवन यात्रा मंगलमय नहीं होगी। भगवान की कथा मन से नहीं सुनने के कारण ही जीवन में पूरी तरह से धार्मिकता नहीं आ पाती है। आज का मानव तो केवल माया का बंधन ही चारों ओर बांधता फिरता है। और बार बार इस माया के चक्कर में इस धरती पर अलग अलग योनियों में जन्म लेता है। उक्त प्रवचन क्षेत्र के गांव चंदफरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस बाल व्यास वृंदा किशोरी ने कहे। उन्होंने शुकदेव जी के जन्म का वृतांत विस्तार से वर्णन किया।

कथा का आयोजन मां लीलावती आश्रय के तत्वावधान में किया जा रहा है। कथा विश्राम होने पर कन्याओं का विवाह भी संपन्न होगा। वहीं बाल व्यास बृज किशोर महाराज नेे कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा की भागवत वही अमर कथा है जो भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी। कथा सुनना भी सबके भाग्य में नहीं होता। भगवान को अपना परिवार मानकर उनकी लीलाओं में रमना चाहिए। संतों का सानिध्य हृदय में भगवान को बसा देता है। क्योंकि कथाएं सुनने से चित्त पिघल जाता है और पिघला चित में ही भगवान को बसा सकते हैं। श्रीमद् भागवत कथा श्रवण ऐसा माध्यम है जो जन्म, मरण के बंधन से मुक्त कराकर नारायण के धाम में सदा के लिए आपको स्थान दिलाएगा। परीक्षित रंजनी तोमर व रंजीत तोमर रहे। कथा में विशाल शर्मा, पप्पू शर्मा, विनोद शर्मा, राजेंद्र कुमार, सोनू शर्मा, राजेश शर्मा, मधु शर्मा आदि थे।