बाजारों में घुलने लगी घेवर की मिठास, भाई-बहन के प्रेम की पुलक
इगलास। सावन की रिमझिम फुहारों और रक्षाबंधन की खुशियों के बीच एक मिठाई ऐसी है, जिसके बिना त्योहार अधूरा सा लगता है वह है घेवर। घी में तला गया यह मधुर व्यंजन केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद खास माना जाता है। ब्रज व राजस्थान अंचल में घेवर तीज और रक्षाबंधन जैसे पर्वों पर बहनों द्वारा मायके ले जाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इगलास में जहां चमचम की महक रची-बसी है, वहीं सावन में घेवर की मांग भी खूब बढ़ जाती है। इस बार भी बाजारों में घेवर की मिठास घुलने लगी है। दुकानों पर लोगों की भीड़ है और मिठाई विक्रेताओं के चेहरों पर रौनक।
इगलास कस्बा को चमचम सिटी के नाम से भी जाना जाता है। यहां की प्रसिद्ध मिठाई चमचम देश-विदेश में भी खास है। कोई भी त्यौहार व अतिथियों का स्वागत इसके बिना अधूरा माना जाता है। चमचम सस्ती होने के साथ स्वाद में लाजवाब होती है। लेकिन मानसून के साथ मिठाई की दुकानों पर घेवर भी खूब नजर आने लगा है। क्योंकि सावन और घेवर का अनूठा साथ है। यह मिठाई सावन के महीने में ही बिकती है। इसके बाद दुकानों पर दिखाई नहीं देती। रक्षाबंधन पर तो इसका विशेष चलन है। बहनें भाइयों के लिए राखी के साथ घेवर ले जाती है। यहां चमचम के साथ घेवर की भी खूब डिमांड हो रही है। विक्रेताओं पर आडर आने लगे हैं तो उन्हें ज्यादा कारीगर लगाने पड़ रहे हैं। चमचम के जनक रघ्घा सेठ के देशी घी से निर्मित घेवर की खूब मांग है। दिनेश सिंघल बताते हैं कि इस मौसम में मावे की व अन्य मिठाईयों की मांग नहीं होती सिर्फ घेवर व चमचम ही बिकता है। देशी घी का घेवर 440 रुपये प्रति किलो है, लेकिन स्वाद और स्वास्थ्य दोनों में अव्वल। वहीं रिफाइंड घी का घेवर थोड़ा सस्ता है। ननुआ, मंगला, राधे, पचौरी व गोपाल आदि की दुकानों पर भी घेवर व चमचम की खूब मांग है।
ऊर्जावान बनाता है घेवर
बरसात के मौसम में शरीर में वात और पित्त दोष बढ़ने लगते हैं, जिससे थकान, एसिडिटी और ड्राइनेस की समस्या हो जाती है। ऐसे में देसी घी से बना घेवर शरीर को न केवल ऊर्जावान बनाता है, बल्कि इम्युनिटी को भी बढ़ाता है। यही वजह है कि मानसून में इसे खाना लाभकारी माना जाता है।
घेवर बनाने का तरीका

पारंपरिक घेवर मैदे के घोल से तैयार किया जाता है। घोल को कढ़ाई में घी में डूबे लोहे के सांचों में धीरे-धीरे डालकर बनाते हैं। इसका स्वरूप मधुमक्खी के छत्ते जैसा होता है। इसलिए इसे अंग्रेजी में हनीकाम्ब डेजर्ट भी कहा जाता है। चाशनी में डूबी इस मिठाई को मावा और सूखे मेवों से सजाकर परोसा जाता है। जो हर किसी के स्वाद को यादगार बना देता है।
