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गभाना में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती पर शौर्य का शंखनाद, 50 युवाओं ने किया रक्तदान

गभाना। मातृभूमि की आन-बान और शान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती की पूर्व संध्या पर गभाना की धरती ‘सेवा और संकल्प’ के एक नए रंग में रंग गई। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा अलीगढ़ के तत्वावधान में मनाए जा रहे ‘युवा जागृति दिवस’ के अवसर पर शारदा मैरिज होम में एक विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित हुआ। यहाँ शस्त्रों की टंकार नहीं, बल्कि मानवता को बचाने की पुकार सुनाई दी, जहाँ 50 रक्तवीरों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर लगभग 200 परिवारों के चिराग बचाने का पुनीत बीड़ा उठाया। शिविर का शुभारंभ प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. शैलेंद्रपाल सिंह, मंडल अध्यक्ष विवेक प्रताप सिंह व जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित कर किया।

परंपरा और प्रगति का संगम

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्रपाल सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि एक विचार हैं। उन्होंने घास की रोटी खाना स्वीकार किया लेकिन अपनी अस्मिता का सौदा नहीं किया। आज के युवाओं के लिए वही वीरता अब सामाजिक सरोकारों में बदलनी चाहिए। जब आप रक्तदान करते हैं, तो आप अपनी रगों में दौड़ रहे उस स्वाभिमानी रक्त को समाज के अंतिम व्यक्ति की जीवन रक्षा के लिए समर्पित करते हैं। यही आधुनिक युग का ‘अश्वमेध यज्ञ’ है और यही हमारे पूर्वजों को दी जाने वाली सच्ची श्रद्धांजलि है।

रणभूमि की विरासत, सेवा की सियासत

मंडल अध्यक्ष विवेक प्रताप सिंह ने महाराणा प्रताप के ऐतिहासिक बलिदान को आज के परिप्रेक्ष्य में जोड़ते हुए कहा कि महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी में देश की अखंडता के लिए अपना रक्त बहाया था। आज का युवा उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए अस्पतालों में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे लोगों के लिए अपना रक्त दे रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल नारों में नहीं, बल्कि ऐसे रचनात्मक कार्यों में बसती है।

त्याग और मर्यादा की प्रतिमूर्ति

मंडल उपाध्यक्ष डॉ. भानु प्रताप सिंह ने भगवान श्री राम और महाराणा प्रताप के जीवन की समानता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन दोनों ही विभूतियों ने धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए महलों का सुख त्याग कर जंगलों को चुना। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राजसी ठाठ-बाट के मोह को छोड़कर समाज निर्माण और राष्ट्र की सेवा में अपना योगदान दें।

युवा शक्ति का उदय

शिविर में सुखद और गौरवपूर्ण उपलब्धि ग्रामीण अंचल की बदलती सोच के रूप में सामने आई। संस्था के प्रवीण शर्मा ने बताया कि शिविर में 18 ऐसे युवा पहली बार रक्तदान करने पहुंचे, जिनके मन में पहले कई भ्रांतियां थीं। इन युवाओं का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रही नई सामाजिक चेतना का प्रतीक है। जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने खुशी जताते हुए कहा कि महासभा का ‘जागृति मिशन’ अब जमीनी स्तर पर सफल हो रहा है।

सामूहिक समर्पण और आभार

शिक्षक प्रकोष्ठ के मंडल प्रभारी सुनील सिंह ने सभी रक्तदाताओं और सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में मुनेंद्र सिंह, विजय सिंह, गौरव सिंह, पीयूष जादौंन, दीपू सिंह, कालू सिंह, राहुल सिंह, अमित सिंह, यश कुमार, भूपेंद्र सिंह, सुधीर राना, राहुल लोधी, हरेंद्र सिंह, अवधेश सिंह, रमा सिंह, राजकुमार, अंशुमान सिंह, मोहित आदि का सराहनीय योगदान रहा।

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