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इंडेन बॉटलिंग प्लांट में गैस पाइप लीकेज से लगी आग, मचा हड़कंप

- प्लांट से सायरन बजते ही मची अफरा-तफरी, घंटों मशक्कत के बाद पाइप लीकेज पर पाया काबू

 

अलीगढ़। अलीगढ़ -खैर रोड गांव करसुआ स्थित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) इंडेन बाटलिंग प्लांट में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक ऑपरेटर ने 150 मीट्रिक टन एलपीजी स्टोरेज बुलेट बॉटम को रिमोट ऑपरेटेड वॉल्व (आरओवी) से जोड़ने वाली एलपीजी पाइपलाइन में लीकेज देखा। जिससे आग की लपटें उठ रही थी । इस पर मैनुअल कॉल प्वाइंट (एमसीपी)  का उपयोग करते हुए आपातकालीन सायरन बजाया गया। इसके बाद बॉटलिंग प्लांट पर अफरा- तफरी मच गई। कुछ ही देर में फायर, एंबुलेंस, एसडीआरएफ समेत कई टीमें मौके पर आ गई। जिसके बाद आग बुझाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।



कारखाने की अग्नि हाइड्रेंट सुविधा द्वारा की गई। इसके बाद, राज्य अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं से दमकल, बीपीसीएल सलेमपुर से आपसी सहायता और लोधा थाना के पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और सभी आग बुझाने में जुट गए। इस दौरान आस-पास के गांव में ग्रामीण किसी अनहोनी की आशंका में भयभीत हो गए। सबके मन में बस एक ही सवाल था कि आखिर बॉटलिंग प्लांट में क्या हुआ है ? जब सभी को इंडेन बॉटलिंग प्लांट में इमरजेंसी मॉक फायर ड्रिल (ईआरडी) के आयोजन की जानकारी मिली तो सभी ने राहत की सांस ली। मॉक ड्रिल के दौरान मौजूद इंजीनियरों की टीम ने प्लांट को सुरक्षा की दृष्टि से बंद कराते हुए वहां मौजूद लोगों को बाहर निकाल दिया। दमकल और इंजीनियरों की टीमें गैस रिसाव को बंद करने में जुट गईं। इस दौरान प्लांट में वाहनों की आवाजाही को भी बंद करा दिया गया। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद टीम को गैस रिसाव पर काबू पाने में सफलता मिली। गैस रिसाव बंद हो जाने पर वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इस दौरान प्लांट में सिलेंडरों और गैस रिफलिंग का काम बंद रहा।

इस संबंध में महाप्रबंधक (संयंत्र) सुनील कुमार प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में बताया कि एलपीजी वेपर पाइपलाइन आरओवी में रिसाव के कारण बॉयलिंग लिक्विड एक्सपैंडिंग वेपर एक्सप्लोशन (बीएलईवीई) के कारण आग के गोले बन सकते हैं।1800 मीट्रिक टन क्षमता का एक और माउंडेड स्टोरेज एरिया है। आग के गोले अन्य सभी भंडारण को प्रभावित कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सबसे खराब परिणाम होता है, जिसे डोमिनोज़ प्रभाव या कैस्केडिंग प्रभाव कहा जाता है। वरिष्ठ प्रबंधक (संयंत्र) अरुण शर्मा ने कहा कि एलपीजी बीपी के आपातकालीन नियंत्रण केंद्र का उपयोग स्थानीय आपातकालीन नियंत्रण कक्ष के रूप में किया जाता है। उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान घायल हुए लोगों को खतरे के क्षेत्र से बाहर निकालकर व्यावसायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन वाहन का उपयोग करते हुए प्राथमिक चिकित्सा केंद्र ले जाया गया। उन्होंने कहा कि आपदा की आपात स्थिति की घोषणा के बाद संयंत्र में सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया।



सहायक प्रबंधक (संयंत्र) हिमांशु वार्ष्णेय ने कहा कि हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। हालांकि कंपनियों के पास ऑफ-साइट और ऑन-साइट योजनाएं हैं, जिसे उन्हें व्यवहार में लाना चाहिए। पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद बीपीसीएल के रमेश ने कहा कि आपदा प्रबंधन प्रक्रिया के दौरान हवा की दिशा एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है। अग्निशमन अधिकारी खैर अभिषेक चौधरी ने कहा कि आपात स्थिति में वाहनों की आवाजाही को महत्व देना चाहिए और मार्ग को साफ रखना चाहिए।

सुरक्षा अधिकारी भुवन विरथरे, सहायक प्रबंधक (एलपीजी-सुरक्षा) ने कहा कि एलपीजी आपदा के बारे में जागरूक करने के लिए आस-पास रहने वाले निवासियों को आपातकालीन सायरन द्वारा सूचित किया जाता है।

एमएस मेहता उप महाप्रबंधक (संयंत्र), एम के राजपूत वरिष्ठ प्रबंधक (संयंत्र), दीक्षा सक्सेना सहायक प्रबंधक (संयंत्र), अतुल राज मीणा संचालन अधिकारी और मनीष कुमार संचालन अधिकारी सहित अन्य उपस्थित अग्निशमन अधिकारी अधिकारी खैर अभिषेक चौधरी व फायरमैन किरण कुमार फायरमैन चरण सिंह पंकज कुमार योगेंद्र सरवन कुमार आदि मौजूद थे।

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