गभाना में भागवत कथा- भक्ति में ही परम आनंद- विजयकृष्ण
गभाना। नगर में तहसील के सामने स्थित मदनधाम कॉलोनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा सम्राट विजय कृष्ण चतुर्वेदी ने कहा कि जीवन में यदि मान, बड़ा पद या प्रतिष्ठा मिल जाए तो ईश्वर की कृपा मानकर भलाई के कार्य करने चाहिए, लेकिन यदि उसका जीवन में किंचित मात्र भी अभिमान हुआ तो वह पाप का भागीदार बना देता है।
उन्होंने कहा कि अहंकार से भरे राजा परीक्षित ने जंगल में साधना कर रहे शमीक ऋषि के गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया। परिणामस्वरूप राजा परीक्षित को एक सप्ताह में मृत्यु का श्राप मिला। 
जब परीक्षित ने अपने सिर से स्वर्ण मुकुट को उतारा तो उन पर से कलियुग का प्रभाव समाप्त हो गया और उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कथा व्यास ने कहा कि जब- जब भगवान के भक्तों पर विपदा आती है तब भगवान उनके कल्याण के लिए सामने आते हैं। परीक्षित को भवसागर से पार लगाने के लिए अब भगवान शुकदेव के रूप में प्रकट हो गए और श्रीमद भागवत कथा सुनाकर परीक्षित को अपने चरणों में स्थान प्रदान किया। कहा कि नारायण की भक्ति में ही परम आनंद मिलता है।
भगवान प्रेम के भूखे हैं। वासनाओं का त्याग करके ही प्रभु से मिलन संभव है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि वासना को वस्त्र की भांति त्याग देना चाहिए। कथा के दौरान उन्होंने भक्त प्रहलाद, भरत चरित्र की कथा सुनाई। साथ ही कई धार्मिक प्रसंगों व भजनों के माध्यम से श्रोता को भाव विभोर कर दिया। कथा के दौरान आज शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जायेगा। आयोजन में नीरज गुप्ता, अतुल गुप्ता, विनोद गुप्ता, कांतीलाल गुप्ता, अमन गुप्ता, कृष्ण कुमार शर्मा, भोला वर्मा, धर्मेंद्र ठाकुर, विनेश कुमार सिंह, चौ. मनवीर सिंह, आदर्श अग्रवाल, विवेक गुप्ता, राेहित राघव, सुधा गुप्ता, तनु अग्रवाल, सुमन गुप्ता, ललितेश अग्रवाल, रमा गुप्ता, निधि गुप्ता, मोनिका अग्रवाल, अंजना अग्रवाल आदि मौजूद रहे।