मुरवार में कलश यात्रा के साथ भागवत कथा शुरू
नगला जुझार। क्षेत्र के गांव मुरवार में बुधवार को भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ ग्राम प्रधान व भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष राजकुमार व नाहर भगत जी ने फीता काटकर के किया गया।
कलश यात्रा कथा स्थल से शुरू हुई और गांव की गलियो से होते हुए वापस कथा स्थल पर पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा में बड़ी संख्या में महिला व छोटी-छोटी कन्यायें पीत वस्त्र पहन कर व सिर पर कलश धारण कर शामिल हुई। इससे पूर्व कथा स्थल पर हवन पूजन किया गया। कथा का शुभारंभ करते हुए कथावाचक जया किशोरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा, ऐसी कथा है, जो जीवन के उद्देश्य एवं दिशा को दर्शाती है। इसलिए जहां भी भागवत कथा होती है, इसे सुनने मात्र से वहां का संपूर्ण क्षेत्र दुष्ट प्रवृत्तियों से खत्म होकर सकारात्मक उर्जा से सशक्त हो जाता है। इस मौके पर रमेश सिंह, शिव सिंह, संतोष सिंह, सुघड़ सिंह, सूखा, बंटी, बाबू, मनोज सहित आदि ग्रामवासियों का सहयोग रहा।
श्रीमद् भागवत कथा का सुदामा चरित्र व्यास पूजन के साथ हुआ समापन
बेसवां। इगलास क्षेत्र के गांव साथनी बायसी में आयोजित श्रीमद् भागवत गीता महापुराण के अंतिम दिन बुधवार को कथावाचक महाराज दुष्यंत कृष्ण शास्त्री ने सुदामा चरित्र, दत्तात्रेय के २४ गुरुओं की कथा परीक्षित मोक्ष का वृतांत सुनाया। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण के बालपन के परम सखा सुदामा का चरित्र भागवत कथा के अन्य चरित्रों से बिल्कुल अलग और बड़ा ही विचित्र है। जब सुदामा एकदम गरीबी की हालत में अपनी पत्नी के कहने पर परम सखा श्री कृष्ण को मिलने द्वारिका जाते हैं तो द्वारपाल सुदामा को फटे हाल देखकर दुत्कार देते हैं।
साथ ही सुदामा जब बताते है कि द्वारकाधीश श्री कृष्ण मेरे बाल सखा है तो द्वारपाल बहुत हंसी उड़ाते है। लेकिन जैसे ही श्री कृष्ण को संदेश मिलता है कि बाल सखा सुदामा मिलने आया है। तो श्री कृष्ण सिंहासन छोड़कर अपने बाल सखा को गले लगाकर प्रेम के आसु बहाते है। कथा मां चामुण्डा मंदिर पर श्रीमद् भागवत पुराण आचार्य की विदाई पर भावुक हो उठे ग्रामीण । परीक्षित बने बलवीर सिंह ने बताया की गुरुवार को श्री मद भागवत पंडाल में भंडारे का आयोजन हैं। इस मौके पर नत्थी सिंह, चंद्रपाल सिंह, लव चौधरी, संजय सिंह, धर्म राज, जीतू,योगेंद्र सिरोही, लकी हिंडोल, रोहित, कुंजबिहारी सोनी,पवन सोनी अनुराग पंडित, मोहन सिंह आदि लोग मौजद रहे।