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पेंटिंग में प्रमुख कारक हैं मानसिक-चेतना या आत्म-अवलोकन

अलीगढ़। मंगलायतन विश्वविद्यालय में चित्रकला पर लाइव प्रदर्शन आधारित अतिथि व्याख्यान सत्र आयोजित किया गया। शिप्रा ब्लाक में व्याख्यान को आयोजित करने का प्राथमिक उद्देश्य प्रतिभागी छात्रों को पेंटिंग के सिद्धांतों और इसके विभिन्न तकनीकी पहलुओं से परिचित कराना था और उन सिद्धांतों को व्यावहारिक आधार पर कैनवास पर कैसे लागू करना है।




प्रख्यात कलाकार और शिक्षाविद डा. शिवेंद्र सिंह को ‘‘मानस चेतना एवं अभिव्यक्ति: चित्रकला के संदर्भ में’’ विषय पर व्याख्यान-प्रदर्शन सत्र आयोजित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। सहायक प्रोफेसर अजय सिंह राठौर ने अतिथि का स्वागत किया। प्रो. सिंह ने लाइव प्रदर्शन और उदाहरणों के साथ पेंटिंग के विभिन्न पहलुओं को समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि अपने विषय वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। मानसिक-चेतना या आत्म-अवलोकन एक पेंटिंग में प्रमुख कारक है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस सत्र का उद्देश्य विषय की विशेषताओं और विवरण के गहन दृष्टिकोण की ओर उन्मुख करना है। पेंटिंग के माध्यम से अभिव्यक्ति की सुंदरता की सराहना करने पर ध्यान होना चाहिए। विभागाध्यक्ष डा. पूनम रानी ने मुख्य अतिथि को अंग-वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। विभागाध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी है। यह आत्मविश्वास और रचनात्मकता विकसित करता है। इस अवसर पर पं. देबाशीष चक्रवर्ती, विलास पालखे, डा. रामकृष्ण घोष, डा. प्रेमलता, उदय कुमार उपस्थित रहे। सत्र अतिथि व विद्यार्थियों के बीच प्रश्न-उत्तर संवाद के माध्यम से समाप्त हुआ।

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