शिव विवाह प्रसंग सुन भाव विभार हुए श्रोता
इगलास। इस संसार में सब कुछ होने पर भी मनुष्य दुखी है। उसके मन में आनंद नहीं है। एक वस्तु प्राप्त हो जाती है तो दूसरी वस्तु को प्राप्त करने की लालसा मन में जाग्रत हो जाती है। आज मनुष्य इन इच्छाओं के पीछे भागने में जीवन के सत्य व आनंद को पीछे छोड़ता जा रहा है।
यदि जीवन के आनंद को प्राप्त करना है तो भगवत मार्ग पर चलना होगा। शिव के ध्यान में जो आनंद है वह कहीं और नहीं है। यदि शिव से स्वयं को जोड़ लिया तो जीवन का उद्धार हो जाएगा।
उक्त प्रवचन कस्बा के वनखड़ी महादेव मंदिर पर चल रही श्री शिव महापुराण की कथा में शुक्रवार को आचार्य मंयक उपाध्याय ने कहे। उन्होंने आगे भगवान शिव व माता पार्वती के विवाह प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। श्रोताओं को शिव-पार्वती के स्वरुप के दर्शन भी कराए गए। इस दौरान पूरा प्रांगण हर हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया।