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टोल प्रबंधन के तानाशाही रवैया को लेकर ग्रामीणों में पनपा आक्रोश, किया हंगामा

- स्थानीय लोगों को नि:शुल्क फास्टेग के बदले जबरन थोपा जा रहा है मासिक पास

गभाना। टोल प्रबंधन के तानाशाही रवैया को लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। गुस्साएं ग्रामीणों ने टोल प्लाजा पर एकत्रित होकर जमकर हंगामा किया। मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस व चेयरमैन ने गुस्साएं ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत किया तथा टोल प्रबंधन से स्थानीय लोगों के वाहनों को पूर्व की तरह निश्शुल्क निकालने के लिए वार्ता की। जिस पर टोल मैनेजर ने सोमवार को स्थानीय लोगों के साथ टोल प्रबंधन के उच्चाधिकारियों की वार्ता कराकर समाधान कराने का आश्वासन दिया। तब कहीं जाकर गुस्साएं ग्रामीण शांत हुए।

बता दें कि एनएचएआई व टोल प्रबंधन ने टोल प्लाजा के सात किलोमीटर के दायरे में आने वाले ग्रामीणों को नि:शुल्क फास्टेग की सुविधा दे रखी थी, जबकि बीस किलोमीटर के दायरे में आने वाले ग्रामीणों के लिए मासिक फास्टेग की सुविधा उपलब्ध करा रखी थी। पिछले एक सप्ताह ने टोल प्रबंधन ने सात किलोमीटर के दायरे में आने वाले वाहन चालकों के नि:शुल्क फास्टेग को बंद कर दिया है। जिससे स्थानीय लोगों को मजबूरन अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है, वहीं भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसको लेकर शुक्रवार को दर्जनों वाहन चालक व ग्रामीण एकत्रित होकर टोल प्लाजा पर पहुंच गए और टोल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन करने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में भी टोल प्लाजा से स्थानीय लोगों को आधार कार्ड व अन्य आईडीकार्ड से निकाला जाता रहा है। फास्टेग की सुविधा शुरू होने के बाद भी स्थानीय ग्रामीणों को नि:शुल्क सुविधाएं दी जाती रही हैं। जबकि एक सप्ताह से टोल प्रबंधन ने अपना तानाशाही रवैया अपनाते हुए बिना किसी सूचना के स्थानीय लोगों टोल बसूलना शुरू कर दिया है। जब टोल कर्मियों से वार्ता करो तो वह कोई भी संतोषजनक जबाब नहीं देते, बल्कि अभद्रता पर उतारू हो जाते है।ग्रामीणों के प्रदर्शन की सूचना पर गभाना चेयरमैन कुंवर अभिमन्युराज सिंह व इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह मय फोर्स के मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गुस्साएं ग्रामीणों को समझाते-बुझाते हुए शांत किया और टोल मैनेजर दिनेश कुमार से ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए वार्ता कराई। टोल मैनेजर ने सोमवार को टोल प्रबंधन के उच्चाधिकारियों के साथ ग्रामीणों की बैठक कराकर समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। जिस पर ग्रामीण समस्या का समाधान न होने पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी देते हुए शांत होकर लौट गए।

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