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भरत चरित्र श्रवण से ही प्रभु चरणों में लग जाता है मन : अवधेशदास

- श्री रघुपति के चरित्र सुनने से ही पार हो जायेगी जीवन रूपी नौका

अलीगढ़। भगवान हर जगह हैं, लेकिन मिलेंगे कैसे, बोले प्रेम से मिलेंगे। यह उद्गार निर्मोही अखाड़ा चित्रकूट धाम के महंत अवधेशदास जी महाराज ने भरत चरित्र, शबरी, गिद्धराज संवाद कथा के संदर्भ में कहीं। महामण्डलेश्वर अवधेश दास महाराज बोले कि वास्तव में जो भवसागर पार करना चाहे, वह क्या करे। संसार भी सागर की तरह है। बोले रामकथा भक्तों के लिए सदृश्य नौका की तरह है। जिसने रामकथा का सहारा लिया वह सरलता के साथ भव सागर से पार होगा। किसी यान, किसी विमान और किसी नौका की भी आवश्यकता नहीं है। मात्र भगवन श्री रघुनाथ के चरित्र सुनने मात्र से ही व्यक्ति भव सागर तर जायेगा। भगवान की इतनी बड़ी महिमा है। गोस्वामी जी कहते हैं कि जो भगवान के चरित्रों को गाते व सुनते हैं, वह सागर से बड़े ही सरलता से पार हो जाते हैं। वह कहते हैं कि जो भरत जी का चरित्र नित-दिन पढ़ते व सुनते हैं प्रभु सीताराम जी के चरणों में उनका मन लग जाता है।संत प्रवर बोले केवट को विदा देकर भगवान चल पड़े और भगवान बाल्मीकि जी के यहां पहुंच गये, उन्हें दण्डवत प्रणाम किया। बाल्मीकि को पता चला कि भगवान आए हैं तो वह बहुत प्रसन्न हुए और उनको अपने आश्रम में ले गये। भगवान कहने लगे हे ऋषि महाराज आपको पता है कि मैं वन में किसलिए आया हूं। आप जैसे महात्मा का दर्शन होना मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। भगवन बोले आप ऐसी जगह बताएं मैं जानकी और छोटे भ्राता संग निवास कर सकूं। बाल्मीकि बोले भगवान ऐसी कौन सी जगह है जहां आप नहीं हो। भगवान तो सबके हृदय में रहते हैं, लेकिन मिलेंगे कैसे, केवल प्रेम से मिलेंगे। संत बोले पृथ्वी पर हर जगह पानी है, लेकिन निकलता कब हैं, जब खुदाई की जाती है। उसी तरह भगवान हर जगह हैं, लेकिन मिलेंगे तब जब सब मन की सफाई की जाती है। मायारूपी पर्दा को जब तक हटाओगे नहीं, तब तक भगवान को देख नहीं पाओगे। कथा के मुख्य यजमान ममता भारद्वाज और मनोज अग्रवाल रहे।

कार्यक्रम में श्री अखलेश्वर महादेव मंदिर समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष सतीश गौड़, सचिव मनोज अग्रवाल, कोषाध्यक्ष बृजमोहन वार्ष्णेय, उपाध्यक्ष सतेन्द्र प्रकाश गुप्ता, उपसचिव प्रवीण वार्ष्णेय (गायत्री), मीडिया प्रभारी नवीन शर्मा व सदस्य मुकेश सिंघल (रामांचल), ज्ञानेन्द्र गुप्ता, आनन्द स्वरूप गोयल, विनोद गुप्ता, प्रवीन अग्रवाल, सुभाष गौतम का विशेष सहयोग रहा।

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