अलीगढ़ के किसानों ने पेश की संतुलित खेती की मिसाल, यूरिया और डीएपी की खपत में आई कमी
अलीगढ़। जिलाधिकारी अविनाश कुमार के कुशल निर्देशन में अलीगढ़ जिला रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक मॉडल बनकर उभरा है। प्रशासन की सक्रिय निगरानी और ‘फार्मर रजिस्ट्री’ जैसी पारदर्शी व्यवस्था के चलते जिले में यूरिया और डीएपी की खपत में पिछले वर्ष की अपेक्षा उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में यूरिया की बिक्री में 26 प्रतिशत और डीएपी की खपत में 56 प्रतिशत की कमी आई है, जो न केवल किसानों की जागरूकता को दर्शाता है बल्कि पूरे प्रदेश में एक बड़ी उपलब्धि है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में जिले के पास 25,140 मीट्रिक टन यूरिया और 11,532 मीट्रिक टन डीएपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, इसलिए किसानों को घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। किसानों से अपील की गई है कि वे अपनी आवश्यकतानुसार ही खाद खरीदें और खरीदारी के समय पॉस मशीन की रसीद लेना न भूलें। उर्वरकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए अब तक गड़बड़ी करने वाली 02 फर्मों को नोटिस जारी किया है, जबकि 04 के लाइसेंस निलंबित और 01 का लाइसेंस पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है। पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के लिए खाद की बिक्री केवल खतौनी और पॉस मशीन के माध्यम से की जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित खाद के प्रयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है, बल्कि फसलें भी मजबूत होती हैं, जिससे प्राकृतिक आपदाओं और कीटों का खतरा कम हो जाता है।