ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने चावल से भरा ट्रक पकड़ा, थाना में कराया खड़ा
खैर। तहसील क्षेत्र में गरीबों को बांटे जाने वाले सरकारी चावल के कालाबाजारी के थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम ने चावल से भरे ट्रक को पकड़ लिया। जिसमें करीब 300 कुंतल चावल बताया जा रहा है। वहीं ट्रक चालक मौका देखकर फरार हो गया। एसडीएम ने थाना पुलिस को मौके पर बुलाकर ट्रक को थाने भिजवा दिया है। वहीं पूर्ति निरीक्षक को मामले में पारदर्शिता के साथ जांच करने के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को ज्वांइट मजिस्ट्रेट/एसडीएम मृणाली अविनाश जोशी को एक ट्रक में सरकारी चावल के दिल्ली में कालाबाजारी करने के लिए ले जाने की सूचना मिली। जिस पर उन्होंने अलीगढ-पलवल मार्ग पर अर्राना कांटे के पास से एक खड़े ट्रक को पकड़ लिया। जिसमें चावल के बोरे भरे हुए थे। इस दौरान ट्रक चालक मौका देखकर फरार हो गया। एसडीएम ने पुलिस को बुलाकर ट्रक को थाना भिजवा दिया, साथ ही पूर्ति निरीक्षक वीर सिंह को मामले में पारदर्शिता के साथ जांच कर शीघ्र ही रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। पूर्ति निरीक्षक के अनुसार ट्रक में करीब 300 कुंतल चावल है। जो कि बाजार के कट्टों में भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि मामले में जांच की जा रही है।
तहसील क्षेत्र बना राशन की कालाबाजारी का गढ़
ग्रामीणों की मानें तो तहसील क्षेत्र में सरकारी राशन के कालाबाजारी का गढ़ बनता जा रहा है। कई बार शिकायत करने के बाद भी अधिकारी कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं करते हैं। पिछले दिनों भी सरकारी चावल पकड़ा गया था, जिसमें कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। जिससे राशन की कालाबाजारी करने वाले सक्रिय लोगों के हौंसले बुलंद हैं।
गांव-गांव फेरी लगाकर खरीदा जाता है चावल
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में राशन की कालाबाजारी से जुड़े लोग सक्रिय हैं। इससे जुड़े लोग एक चेन की तरह काम करते हैं। गांव-गांव फेरी लगाकर चावल को 14-15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदते हैं। इससे बाद कालाबाजारी से जुड़े लोग जगह-जगह फेरी लगाने वालों से 18-20 रुपये प्रति किलोग्राम से खरीदते हैं और फिर कहीं एक जगह पर उसे इकट्ठा करने के बाद दिल्ली या फिर अन्य राज्यों में इसी चावल को महंगे दामों में बेच देते हैं।