अन्नदाताओं के कठिन परिश्रम के बलबूते उत्तर प्रदेश दुनियां में खेती का पावर हाउस – मनोज कुमार
– एलमपुर में बासमती किसान जागरूकता गोष्ठी का हुआ आयोजन
– कृषि उत्पादन आयुक्त ने किसानों को किया जागरूक
गभाना। क्षेत्र के गांव एलमपुरा में शनिवार को फार्च्यून राइस की ओर से बासमती किसान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को जागरूक करते हुए आय दोगुनी करने के लिए वैज्ञानिक विधि से खेती करने के गुर बताए गए।
कार्यक्रम में पहुंचे कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने कहा कि खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर भारतीय बासमती चावल दुनियाभर में खासा पसंद किया जाता है। इस विशेषता को देखते हुए प्रदेश सरकार बासमती चावल के निर्यात पर जोर दे रही है। बासमती चावल का निर्यात होने से धान उत्पादकों को न केवल फसल का लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सकेगा, बल्कि देश को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी। हमारे अन्नदाताओं के कठिन परिश्रम के बलबूते ही उत्तर प्रदेश को दुनियां में खेती का पावरहाउस कहा जाता है। किसान यदि अपनी उपज को सीधे प्रोसेसिंग मिल में भेजता है तो उसे मण्डी टैक्स नहीं देना होगा। सरकार की मंशा है कि उपज का बड़ा फायदा किसानों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बासमती चावल का उत्पादन बहुत बड़े क्षेत्र में किया जाता है, परन्तु उत्पादन के अनुपात में हमारा निर्यात कहीं कम है। इसकी वजह जरूरत से कहीं ज्यादा रासायनिक खादों, कीटनाशकों का प्रयोग एवं मानक के अनुसार प्रोसेसिंग न होना है। सरकार की कोशिश है कि इन कमियों को दूर करते हुए किसानों को उचित लाभ दिए जाने के साथ ही बासमती चावल के निर्यात को बढ़ाया जाए। प्रदेश के 30 जनपदों को बासमती चावल के लिए जीआई टैग मिला हुआ है, परन्तु उत्पादन के सापेक्ष निर्यात का लाभ लेने में हमारे किसान पीछे हैं। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि निर्यात योग्य बासमती धान को उपजाएं, खेती लागत को कम करें। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि बासमती की जीआई एवं गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए गर्मी का धान न लगाएं।
कमिश्नर नवदीप रिणवा ने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार किसानों के जीवन स्तर को उठाने एवं आय को दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। किसान भाई पर्यावरण एवं जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मानक के अनुसार फसल उगाकर अधिक से अधिक लाभ कमाएं।
DM इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि बासमती धान की खेती एक लंबे समय से होती आ रही है। हरित क्रांति के बाद भारत में खाद्यान्न की आत्म निर्भरता, बासमती धान की विश्व में मांग और निर्यात को ध्यान में रखते हुए इस की वैज्ञानिक खेती काफी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसान जो किसान सम्मान निधि के लाभ से वंचित रह गए हैं, 10 जून तक शिविर का लाभ उठाते हुए औपचारिकताएं पूर्ण कराएं। पात्र लाभार्थी आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवा लें। 15 दिन के लिए चल रहे अभियान का लाभ उठाकर अविवादित विरासत के प्रकरणों का निस्तारण करा दें।
IARI निदेशक डॉक्टर एके सिंह ने गोष्ठी को गुड एग्रीकल्चरल पैरक्टिसिस वर्कशॉप का नाम देते हुए कहा कि यदि हम कीटनाशक दवाइयों को गलत मात्रा, गलत समय व गलत तरीके से उपयोग करेंगे तो उसके दुष्प्रभाव आना लाजमी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बासमती की बकाने रोग प्रतिरोधक किस्म की प्रजाति मिलने वाली है। एपीडा के डाॅक्टर रीतेश शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पूसा बासमती-1 की पैदावार की जाती है। ग्राहक की मांग के अनुरूप हमारा उत्पादन होना चाहिए। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया गया कि बासमती धान की अच्छी पैदावार और उत्तम गुणवत्ता लाने के लिए अच्छी प्रजाति का चुनाव अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। इस दौरान 15 प्रकार के बासमती धान के बीज शोधन, बीजों का उपचार, पौध तैयार करना, रोपाई की तैयारी, सिंचाई प्रबंधन, रासायनिक एवं जैविक खाद का प्रयोग, गुण, उत्पादन, पकने की विधि एवं बीमारियों व कीटों के प्रभाव एवं नियंत्रण के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
अजय भलोटिया ने बताया गया कि फार्च्यून एग्रो मार्ट पिछले 4 वर्ष से 16 किसानों के साथ 10000 एकड़ से अधिक भूमि पर खेती करने के साथ किसानों के धान को उचित दर पर खरीद रहे हैं। फार्च्यून एग्रोमार्ट की अगली योजना 5000 किसानों के साथ 25000 एकड़ भूमि पर किसानों के साथ तीनों फसल पर कार्य करना है। कंपनी द्वारा किसानों को धान का प्रमाणित बीज एवं सुरक्षित कीटनाशक दवाइयां उचित मूल्य पर उपलब्ध कराई जाती है। प्रोजेक्ट से जुड़े किसानों को विषय विशेषज्ञों द्वारा खाद, पानी, कीटनाशक एवं अन्य गतिविधियों के लिए उचित सलाह भी दी जाती है। फसल उत्पादन के उपरांत बाजार भाव पर धान खरीद के साथ प्रति कुंतल 100 रुपये बोनस भी दिया जाता है। विक्रय की गई फसल का भुगतान 72 घंटे में सीधे बैंक खाते में किया जाता है।
इस दौरान छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देकर लोगों को तालियां बचाने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में सीडीओ आकांक्षा राना, एडीएम प्रशासन पंकज कुमार, एसडीएम गभाना केबी सिंह, सीओ गभाना सुमन कनौजिया, दिनेश कुमार चौधरी, प्रमोद तौमर, जय कुमार गुप्ता, उप निदेशक उद्यान डाॅ. मुकेश कुमार, उप निदेशक कृषि यशराज सिंह, जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह, डीएचओ डाॅ. धीरेन्द्र सिंह, डीपीआरओ धनंजय जायसवाल आदि मौजूद रहे।