भुमियां बाबा मंदिर पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, बोल बम के जयकारों से गूंजा मंदिर
गभाना।स्थित श्री सिद्धनाथ भुमियां बाबा मंदिर पर श्रावण मास के पहले सोमवार को जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया और देर शाम तक यह सिलसिला चलता रहा। जिससे मंदिर पूरे दिन बोल बम व भगवान भोले नाथ के जयघोषों व घंटे घड़ियालों से गूंजता रहा। वहीं श्रद्धालुओं के अपार सैलाब को देखते हुए पुलिस-प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहे।
बता दें कि नगर पंचायत के गभाना के कन्होई में दिल्ली-हावड़ा रेलवे लाइन के सहारे बना श्री सिद्धनाथभुमियां बाबा आश्रम प्राचीन समय से ही चमत्कारी आश्रम के रुप मे विख्यात रहा है। मान्यता है कि श्रावण मास में पड़ने वाले सोमवारों को यहां आकर बाबा की समाधी का दूध व जल, बेलपत्र से अभिषेक वकुएं की पूजा-अर्चना करने पर बाबा यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। इसी मान्यता को लेकर सावन के पहले सोमवार को सुबह से ही बाबा के भक्तों का अपार सैलाब मंदिर आश्रम पर उमड़ पड़ा।
मंदिर का इतिहास
चमत्कारी श्री सिद्धनाथ भुमियां बाबा आश्रम का इतिहास काफी पुराना है। मान्यता है कि भुमियां बाबा कन्होई गांव के सहारे एक झोपड़ी में रहते थे और यहीं उनका कुंआ भी था जहां बैठकर वे पूजा-अर्चना व जप- तप किया करते थे। 1866 में देश में अंग्रेजी हुकूमत के समय जब दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक का निर्माण शुरू हुआ तो बाबा के आश्रम के पास कुएं के ऊपर होकर रेलवे लाइन गुजरी।
रेलवे अधिकारियों से बाबा के अनुयाईयों ने रेलवे लाइन कुएं से अलग होकर बनाने की मांग की, लेकिन वह नही माने और कुएं को पाटकर रेलवे लाइन का काम शुरू करा दिया। कुंए के ऊपर से रेलवे लाइन को डालकर शाम को जाते और सुबह आते ताे कुंए के ऊपर से लाइन उखड़ी हुई मिलती। लाख कोशिशों के बाद भी वे कुएं को पाट नही सके। फिर उन्होंने कुएं को बंद किए बिना ही दूसरी तरफ से लाइन डाल दी।
रेलवे लाइन पूरा होने के बाद जब ट्राइल के लिए ट्रेन चली तो चमत्कारी कुएं के पास आकर रूक गई। रेलवे अधिकारियों के लाख प्रयासों के बाद भी जब ट्रेन आगे न बढ़ी तो उन्होंने बाबा की पूजा-अर्चना की। जिसके बाद ट्रेन लाइन पर दौड़ने लगी। तब से लेकर आज तक यहां से गुजरने वाली ट्रेनों के चालक दल से जुड़े सदस्य बाबा के इस आश्रम व कुएं के सामने श्रद्धा के साथ सिर झुकाकर जरूर जाते हैं। बाबा के इस आश्रम में समाधि के अलावा अन्य कई देवी-देवताओं के मंदिर बने हुए हैं।
SDM व CO ने परखी सुरक्षा व्यवस्था
मंदिर परिसर मे भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेटिंग की गई थी। सबसे ज्यादा मशक्कत रेलवे लाइन के बीच में बने प्राचीन कुएं को लेकर देखने को मिली। चूंकि अब रेलवे की चारों लाइनों पर ट्रेनों का संचालन हो रहा है ऐसे में किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए उक्त कुएं के स्थान पर मंदिर परिसर में ही एक कृत्रिम कुएं का निर्माण कराकर पाइप लाइन के जरिए उसे पुराने कुएं से जोड़ दिया गया है।
श्रद्धालु रेलवे लाइन की ओर न जा सकें इसके लिए बकायदा रेलवे लाइन के पास कंटीले तारों वबल्लियों से बैरिकेटिंग की गई है। सुबह एसडीएम केबी सिंह, सीओ सुमन कनौजिया, तहसीलदार उदयवीर सिंह, नायबतहसीदारअजेंद्रतौमर ने पहुंचकर बाबा की समाधि पर जलाभिषेक किया। बाद में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रखने में इंस्पेक्टर रामकुंवर सिंह थाने व जिले से आए पुलिस फोर्स के साथ दिन भर जुटे रहे। सीओ मोहसिन खान ने पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
जमकर झूमे श्रद्धालु
मंदिर परिसर में डीजे पर चल रहे भजनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। वहीं बाहर लगे मेले में बच्चों से खेल-तमाशों का जमकर व झूलों का जमकर लुत्फ उठाया। वहीं महिलाओं ने सौंदर्य प्रशाधन समेत अन्य घरेलू सामान की जमकर खरीददारी की।
इस दौरान भुमियां बाबा सेवा समिति के संरक्षक रवि कुमार सिंह, केके सिंह, हरेंद्र सिंह एडवाेकेट, गोपाल दास, निरंजन सिंह, राकेश कुमार सिंह, सतीश कुमार सिंह, ऋषिपाल सिंह, दिलीप शर्मा आदि पदाधिकारियों के साथ अन्य व्यवस्थाओं को बनाने में कड़ी मशक्कत करते रहे।