कलियुग के ‘श्रवण कुमार’ माता-पिता को करा रहे हैं कांवड़ से यात्रा
– रामघाट से गंगा स्नान के बाद अलीगढ़ के रास्ते जा रहे हाथरस
– सासनी के विलेश्वर धाम मंदिर में जलाभिषेक के साथ करेंगे धार्मिक यात्रा का समापन
अलीगढ़। श्रवण कुमार की पितृ एवं मातृ भक्त की कथा लोगों ने पढ़ी और सुनी है। जब उन्होंने एक कंधे पर कांवड़ में अपने अंधे-माता-पिता को बिठा कर तीर्थ यात्रा कराई थी। परंतु आज के दौर में लोग अपने वृद्ध माता-पिता को वृद्ध आश्रम तक में छोड़ने से भी परहेज नहीं करते हैं।
फिर भी कुछ ऐसे लोग सामने आ जाते हैं और इस युग में भी श्रवण कुमार कहलाने लगते हैं। हम बात कर रहे हैं हाथरस जनपद के कस्बा सासनी की हरी नगर कॉलोनी निवासी 90 वर्षीय दिव्यांग (नेत्रहीन) बदन सिंह बघेल की। बदन सिंह की इच्छा थी कि अपने बेटों के साथ गंगा स्नान करने जाएं। बदन सिंह ने अपनी इच्छा अपने तीनों पुत्रों रमेश कुमार, विपिन कुमार व योगेश कुमार को बताई।
तीनों पुत्र पूरे परिवार सहित पिता के साथ माता अनार देवी को साथ लेकर रामघाट (बुलन्दशहर ) पहुंचे। जहां उन्होंने गंगा घाट पर माता- पिता को स्नान कराया। फिर तीनों बेटे आधुनिक श्रवण कुमार बन गए। तीनो भाई गंगाजल के साथ कांवड़ बनाकर लेकर चल पड़े। एक तरफ अंधे पिता तो दूसरी तरफ माता को बिठाकर पैदल ही भोले शंकर के जयकारों के साथ अपनी यात्रा शुरू कर दी।
इस यात्रा में बेटे क्रमशः रमेश कुमार, विपिन कुमार एवं योगेश कुमार के साथ पुत्र वधू क्रमशः पूजा देवी, उर्मिला देवी एवं रूबी देवी आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए वह यह पदयात्रा कर रहे हैं।
धार्मिक स्थलों पर की पूजा अर्चना
दिव्यांग बदन सिंह के तीनों पुत्रों के अनुसार इस धार्मिक यात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाले सभी धार्मिक स्थलों में पूजा- अर्चना करने के बाद विलेश्वर धाम शिव मंदिर सासनी,( हाथरस) पहुंचकर भोले शंकर का जलाभिषेक कर यात्रा का समापन करेंगे। तीनो भाई और उनकी पत्नियां दिन-रात माता- पिता की सेवा में जुटे रहते हैं। उन्होंने बताया कि वे बचपन से ही श्रवण कुमार की कथा सुनते आ रहे हैं। तभी से उनके मन में भावना रही कि माता-पिता में ही भगवान बसते हैं। उन्होंने कहा कि वे जीवन में अंतिम सांस तक माता- पिता की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि माता-पिता के चेहरे पर संतोष और मुस्कान देखकर हमें लगता रहा है कि साक्षात भगवान भोलेनाथ हम पर अपनी कृपा बरसा रहे हैं। तीनों बेटों और बहुओं के अनुसार मां-बाप इस दुनिया में साक्षात भगवान होते हैं। उनकी सेवा पूजा से कम नहीं होती।
हर कोई कर रहा है तारीफ
धार्मिक यात्रा के दौरान बहू और बेटों को आधुनिक श्रवण कुमार के रूप में देखकर और उनके संकल्प को जानकर सभी आश्चर्यचकित हैं और उनकी सराहना कर रहे हैं।