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गभाना के सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल में मनाई गई शहीदे-ए-आजम भगत सिंह की जयंती, किए श्रद्धा सुमन अर्पित

गभाना। नगर के केशव कुंज स्थित सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल में गुरुवार को शहीदे-ए-आजम भगत सिंह की 116 वीं जयंती मनाई।

संसू, गभाना: कस्बा के केशवकुंज स्थित सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल में गुरुवार को शहीदे-ए-आजम भगत सिंह की 116 वीं जयंती मनाई गई।

इस दौरान शिक्षकों व छात्रों ने भगत सिंह के छवि चित्र पर माल्यार्पण व श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्हें याद किया। इस मौके पर प्रधानाचार्य शिवकांत रावत ने कहा कि सरदार भगत सिंह का जन्म 28 सितबंर 1907 को हुआ था।

शहीदे-ए-आजम का जीवन एक मनुष्य जीवन न होकर प्रेरणादायी कहानी है। इसमें राष्ट्रभक्ति कूट-कूट कर भरी है। युवा पीढ़ी के लिए भगत सिंह से बड़ा राष्ट्रभक्त नहीं मिल सकता है। सन्1919 में हुए जलियां वाला बाग में नरंसंहार के बाद वह काफी परेशान हो गए थे।

जिसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई को छोड़कर देश को आजादी दिलाने की लड़ाई में कूद गए। भगत सिंह की बहादुरी से अंग्रेज काफी हैरान थे। उन्होंने अपने साथी क्रांतिकारी सुखदेव वराजगुरू के साथ मिलकर अंग्रेजों की असेंबली में बम फेंक दिया। जिस पर बौखलाए अंग्रेजों ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को गिरफ्तार कर लिया और सन् 1931 में तीनों को फांसी दे दी गई।

भगत सिंह उस वक्त महज 23 वर्ष के थे। वह ऐसेे युवा थे, जिन्होंने देश के लिए फांसी को हंसते-हंसते चूम लिया। साहस और बलिदान ने उनको स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे लोकप्रित नायकों में से एक बना दिया। भारत की आजादी के लिए उनका बलिदान और अटूट समर्पण आजीवन प्रेरित करता रहेगा।

इस मौके पर राजीव कुमार शर्मा, जितेंद्र राघव, अजय कुमार, राजकुमार कुशवाह, श्याम सिंह, गजेंद्र सिंह राघव, निखिल कुमार, तृष्णा, मानवी, हेमंत कुमार आदि मौजूद रहे।

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