रॉयल स्टार न्यूज : अलीगढ़ और गभाना क्षेत्र से इस समय की प्रमुख खबरें...

महाभारत के नायक श्रीकृष्ण के अर्शीवाद से पूरे होंगे सभी संकल्प – नरेंद्र मोदी

- मथुरा में ब्रजराज उत्सव में कृष्ण जन्मभूमि व शाही मस्जिद के मसले को सुलझाने के दिए संकेत

न्यूज डेस्क। ब्रजभूमि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन-2024 के लक्ष्य को पाने की आधारशिाल रखते गुरुवार को कहा कि महाभारत के नायक श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से सभी संकल्प पूरे होंगे। अयोध्या, काशी, उज्जैन, केदारघाटी की तरह ही भविष्य में भगवान श्रीकृष्ण के भव्यता से दर्शन होने की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही मस्जिद ईदगाह के मसले को भी सुलझाने के साफ संकेत भी दे गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्त कवयित्री मीराबाई की 525 वीं जयंती पर आयोजित ब्रजराज उत्सव में भाग लेने मथुरा पहुंचे थे। यहां पीएम मोदी ने श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने के साथ ही दर्शन किया। वे भागवत भवन के लिए ऊपरी तल पर गए। पीएम मोदी के अलावा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पुजारी समेत 17 लोगों भागवत भवन में पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने मीराबाई के सम्मान में एक विशेष डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया।पीएम ने बृजवासियों से मांगी क्षमा

धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर मीराबाई की 525 वीं जन्म जयंती पर आयोजित ब्रजराज उत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राधे-राधे, जय श्रीकृष्ण के जयघोष के साथ अपना संबोधन शुरु किया। प्रधानमंत्री ने देरी से आने के लिए ब्रजवासियों से क्षमा मांगते हुए कहा, वह राजस्थान के चुनावी मैदान से सीधे यहां भक्ति वातवारण में आए हैं। उन्होंने खुद को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि यहां वही आता है, जिसको श्रीजी और श्रीकृष्ण बुलाते हैं। ब्रज भूमि कोई साधरण भूमि नहीं है। यह भमि श्यामा श्यामजू का धाम है। इसे ब्रज की लाडली और उनके प्रेम के अवतार की भूमि है। यहां की रज पूरे संसार में पूज्यनीय है। यहां की रज में राधा रानी रमी हुई और कण-कण में श्रीकृष्ण समाए हुए है।

चौरासी कोस की यात्रा से मिलता है पुण्य लाभ

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के तीर्थाें की यात्रा से अधिक पुण्य लाभ ब्रज चौरासी कोस की यात्रा से मिलता है। उन्होंने कि कहा सांसद हेमामालिनी तो ब्रज में रम गई हैं। ब्रज का रिश्ता गुजरात से बताते हुए कहा, भगवान श्रीकृष्ण यहां जाकर गुजरात में द्वारकाधीश बने और मीराबाई ने भी अपने अंतिम दिन गुजरात में बिताए। मीराबाई के पदों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, गुजरात से लोग जब उत्तर प्रदेश और राजस्थान में फैले ब्रज में द्वारकाधीश की कृपा से आते हैं। तो उनको यहां की संस्कृति की अनुभूति होती है। इस संस्कृति को प्रधानमंत्री ने सबका विकास और सबका साथ नारे से भी जोडा। कहा, 2014 में मुझे मां गंगा ने बुलाया और तभी से आपकी सेवा में लीन हो गया। प्रधानमंत्री ने कहा यह उत्सव नर-नारायण, जीव-शिव, भक्त और भगवान का प्रेम का उत्सव है।नारीशक्ति का पूजन करने वाल भारत इकलौता देश

पीएम मोदी ने कहा कि हमारा भारत हमेशा से नारीशक्ति का पूजन करने वाला इकलौता देश है। ब्रज में तो पहले लाडली जी की सरकार चलती है। जब तक राधा का नाम श्रीकृष्ण ने नहीं जुड़ता है, तब श्रीकृष्ण का नाम पूरा नहीं होता है। इसेे ब्रजवासियों से बेहतर कोई भी नहीं समझ सकता है। उन्होंने कहा, यहां महिलाओं ने भी भारत में मुश्किल घड़ी में बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां उठाई हैं। सामाज का मार्गदर्शन भी किया। प्रधानमंत्री ने संत मीराबाई के दर्शन को भी समझाया और कहा कि मीराबाई समाज सुधारक और पथप्रदर्शक भी रहीं। वर्तमान काल की चुनौतियों और रुढ़ियों से भी मुक्ति की सीख मीराबाई ने दी। वह विघ्न से नहीं डरती थीं। प्रधानमंत्री ने कहा, जब-जब भारत की चेतना पर प्रहार हुआ है और वह कमजोर हुई है। तो देश के किसी न किसी कोने में जागृत ऊर्जा का पूंज हुआ है। कोई योद्धा बना तो कोई संत। मीराबाई जी इसका एक प्रखर उदाहरण रही है। मीराबाई एक पथ प्रदर्शक रही हैं।

श्रीकृष्ण और मीराबाई दोनों का गुजरात से रहा है नाता

प्रधानमंत्री ने कहा कि मथुरा के इस उत्सव में आना इसलिए भी विशेष है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण से लेकर मीराबाई दोनों का गुजरात से अलग ही नाता है। मथुरा के कान्हा ने गुजरात में द्वारिका बनाई और उनकी महान भक्त मीराबाई ने राजस्थान से आकर अंत समय गुजरात में बिताया था।मीराबाई ने भक्ति और आध्यात्म से ब्रज मंडल को सींचा

मीराबाई राजस्थान की मेवाड़ की रणभूमि में जन्मी और ब्रज चौरासी कोस ब्रज मंडल को मीराबाई ने अपनी भक्ति और अध्यात्म से सींचा था। उन्होंने भारत की चेतना को भी सींचने का काम किया। मेरे तो गिरधर गोपाल पद का जिक्र करते हुए कहा कि ब्रज शौर्य और पराक्रम की भूमि है। जो भारत के अतीत की रक्षा को दिए गए बलिदान की याद दिलाती है। इसकी रक्षा के लिए राजस्थान के लोग दीवार बन कर खड़े रहे, यही भारत की पहचान है। उन्होंने ने कहा, बांसुरी बजाते कृष्ण को देखा तो महाभारत में सुदर्शन चक्रधारी को भी देखा। देश भर के संतों का जिक्र करते हुए कहा, भक्ति और ज्ञान की धारा पूरे संसार में भारत से निकली है।आजादी के बाद ब्रज के विकास को नहीं दिया महत्व

भक्ति आंदोलन का ब्रज को संगम बताते हुए पीएम ने कहा कि आजादी के बाद ब्रज के विकास को महत्व नहीं दिया गया। जो लोग भारत के अतीत, संस्कृति को आज गुलामी की मानसिकता से देखते हैं, उन्होंने ब्रज का विकास नहीं किया। मगर अमृत काल में यह संभव हुआ। गुलामी की मानसिकता दूर हुई। पंच प्रण भी हमने लिए। काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकाल और केदार घाटी में भव्यता और दिव्यता से हो रहे दर्शन की बात कहते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि आने वाले समय में भगवान श्रीकृष्ण के भी उसी तरह भव्यता और दिव्यता से दर्शन होंगे। यह भूमि कान्हा की लीला से जुड़ी है, सरकार उसका संपूर्ण विकास करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा, जब भी किसी राज्य का स्वरूप बदला है तो युद्ध होता है। ऐसे ही महाभारत हुआ है। महभारत के ही नायक श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से हम इन सभी संकल्पों को पूरा करेंगे।

विज्ञापन

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!