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कलश यात्रा के साथ भागवत कथा का शुभारंभ

गभाना। कस्बा के श्री कामेश्वर महादेव मंदिर मंदिर परिसर में शनिवार को भागवत कथा का शुभारंभ हो गया। कथा से पूर्व भव्य कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें महिला श्रद्धालु पीत वस्त्र पहन कर सिर पर कलश धारण कर चल रही थी। वहीं श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों पर झूमते-नाचते हुए चल रहे थे। यात्रा का कस्बा में भ्रमण के दौरान कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। यात्रा कथा स्थल पर पहुंचकर समाप्त। कथा के पहले दिन व्यास अंजनी कुमार शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मोक्ष का साधन है। इसके श्रवण मात्र से जीव को पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होने के साथ प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। कथा के दौरान उन्होंने विभिन्न धार्मिक प्रसंग व भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। आयोजन में संजू सिंह,, रीता सिंह, रेखा सारस्वत, सुमन सारस्वत, अनिल सारस्वत, सचिन सारस्वत, काजल सारस्वत, विनीता सारस्वत, रेखा शर्मा, नीतू सिंह, आरती सिंह, सारिका सारस्वत, पदमपाल माहौर आदि मौजूद रहे।

कर्मों का फल सभी को भुगतान पड़ता है- अवनीश

गभाना। क्षेत्र के गांव सौंगरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को कथा व्यास अवनीश वशिष्ठ ने प्रवचन करते हुए कहा कि भागवत कथा का आश्रय करने वालों को कभी कोई दुख नहीं पहुंचता है। भगवान शिव ने शुकदेव बनकर सारे संसार को भागवत कथा सुनाई है। उन्होंने कहा कि कर्मों अच्छे बुरे कर्मों का फल सभी को भुगतना पड़ता है।उन्होंने भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए कहा कि भीष्म पितामह छह माह तक वाणों की सैय्या पर लेटे रहे थे। तब भीष्म पितामह सोच रहे थे कि मैंने कौन सा पाप किया जो मुझे इतने कष्ट सहन करने पड़ रहे है, मेरे प्राण नहीं निकल रहे हैं। तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें कहा कि आप पुराने जन्मों को याद करो और सोचो कि आपने कौन सा पाप किया था। जब भीष्म पितामह ने कहा कि मैंने अपने पिछले जन्म में रतीभर भी पाप नहीं किया है। जिस पर श्री कृष्ण ने बताया कि पिछले जन्म में आप राजकुमार थे और घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। उसी दौरान सड़क पर पड़े एक नाग को उठाकर फेंक दिया था तब वह कांटों में फंस गया था और छह माह तक उसके प्राण नहीं निकले थे। उसी कर्म का फल है जो आप भुगत रहे हो। कथा व्यास ने कहा कर्मों का फल सभी को भुगतना पड़ता है। इसलिए कर्म करने से पहले कई बार सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान किसी वस्तु, पदार्थ के नहीं बल्कि प्रेम के अधीन है। प्रभु को मात्र प्रेम से ही पाया जा सकता है। हमें सदैव सत्य की राह पर चलना चाहिए। भगवान का दूसरा नाम ही सत्य है। कलयुग में कथा का आश्रय ही सच्चा सुख प्रदान करता है। भागवत कलयुग का अमृत है और सभी दुखों की एक ही औषधि भागवत कथा है। कथा के बीच-बीच में उन्होंने सुंदर भजनों की प्रस्तुति देकर लोगों को झूमने पर विवश कर दिया।कथा के दौरान पहुंचे संत ब्रह्माचारी स्वदेशी महाराज का आयोजकों ने फूलमालाओं से स्वागत किया। आयोजन में अध्यक्ष गिरीश शर्मा, मलिखान गौड़, विजय पाल शर्मा, परीक्षित गवेन्द्र तिवारी, कुक्की सिंह, गिरीश माहेश्वरी, सुभाष चन्द्र, छोटे सिंह, खजांची शर्मा, अमित गौड़, संजय शर्मा, लालाराम शर्मा, भ़ोला प्रधान, हरिओम शर्मा, सरमन शर्मा, लक्ष्मण बघेल, मनोहर सिंह, योगेश गौड़, अभिषेक शर्मा, कपिल शर्मा, नागेश बघेल, कन्हैया बघेल, सौरभ शर्मा, मोंटी शर्मा आदि मौजूद रहे ।

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