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काकोरी कांड के नायक रामप्रसाद बिस्मिल और संत कबीरदास की जयंती मनाई

इगलास। परोपकार सामाजिक सेवा संस्था के तत्वावधान में ग्राम तोछीगढ़ में मंगलवार को दो महान विभूतियों—क्रांतिकारी अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और संत शिरोमणि कबीरदास जी की जयंती बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।

कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं ने देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले वीरों की शौर्य गाथाएं प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। संस्था के अध्यक्ष जतन चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल न केवल महान क्रांतिकारी थे, बल्कि साहित्य, कविता और शायरी में भी पारंगत थे। उनकी कालजयी रचना “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…” आज भी देशवासियों के हृदय में राष्ट्रभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करती है।

उन्होंने बताया कि बिस्मिल जी ने मैनपुरी और काकोरी कांड जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया। 9 अगस्त 1925 को काकोरी स्टेशन के पास अंग्रेजी हुकूमत का खजाना लूटने की योजना को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया, जिसमें बिस्मिल जी समेत अशफाकउल्ला खां, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस क्रांतिकारी कृत्य के लिए इन सभी को फांसी की सजा दी गई थी। 19 दिसंबर 1927 को रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर, अशफाकउल्ला खां को फैजाबाद और रोशन सिंह को इलाहाबाद जेल में फांसी दी गई। इस मौके पर संत कबीरदास जी के जीवन और विचारों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।वक्ताओं ने बताया कि 15वीं सदी के समाज सुधारक संत कबीरदास ने अपने दोहों के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वास, पाखंड और भेदभाव का तीखा विरोध किया।कबीरदास जी का जीवन समरसता, अहिंसा और मानवधर्म की मिसाल है। उनके दोहे आज भी समाज को आईना दिखाने और सही राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम में धीरज सिंह ठैनुआं, सुशील कुमार ठैनुआं, गौरव चौधरी, प्रशांत ठैनुआं, लाला, देवेंद्र सिंह, लकी, कुलदीप, भोला, सूरज और साधना सहित अनेक ग्रामवासी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सभी शहीदों और संत कबीरदास जी के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर किया गया।

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