पीएम आवास के लिए आए फोन कॉल तो न दें जबाव, साइबर ठग बना रहे शिकार
केस नंबर – एक
गभाना नगर पंचायत के मोरहना निवासी पिस्ता देवी पत्नी भूरा सिंह का मकान पिछले साल बारिश में कच्चा मकान ढह गया था। इस पर उन्होंने प्रधानमंत्री आवास पाने के लिए आवेदन किया था। इसी बीच इस आवेदन के बारे में साइबर ठगों को जानकारी हो गई। उन्हाेंने 30 मई को फोन कॉल की और बताया कि आवास योजना का लाभ पाने के लिए पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा, तब ही आवास निर्माण के लिए धनराशि मिल सकेगी। इस पर पिस्ता देवी साइबर ठगों के झांसे मे आ गईं और अपने जेवर गिरवी रखकर 16,500 रुपये फोन- पे के माध्यम से करा दिए। अब पीड़िता न्याय पाने के लिए थाने, चौकी के चक्कर काटने को मजबूर हो।
केस नंबर- दो
कस्बा गभाना के सुमित कुमार ठेल- ढकेल लगाकर परिवार की गुजर-बसर कर रहे हैं। सुमित के अनुसार उनके पास भी पीएम आवास दिलाने के नाम पर एक फोन कॉल आयी। कॉल करने वाले ने बताया कि किस्त तभी जारी होगी जब पे -फोन पर पंजीकरण शुल्क जमा कराना होगा। चूंकि उनके खाते में पिछले दिनों ही पहली किस्त की राशि आ चुकी है, ऐसे में उन्हें एहसास हो गया कि कोई ठग है जो उन्हें ठगना चाहता है। इस पर उन्होंने साफ मना कर दिया। इससे वे ठगी का शिकार बनने से बच गए।
केस नंबर- तीन
गभाना नगर पंचायत के मोहल्ला रामपुर के अजय कुमार ने बताया कि पीएम आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए उनके मोबाइल पर 15 हजार रुपये देने की मांग को एक फोन आया था। मांग पूरी न होने पर किस्त को निरस्त कर देने की धमकी दी गई। चूंकि उनके पास पहली किस्त आ चुकी थी तो उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने की बात कही तो साइबर ठग ने उनका फोन ही कट कर दिया ।
अलीगढ़। यह तो चंद उदाहरण है। हर व्यक्ति की रोटी, कपड़ा और मकान की चाहत मन में रहती है। उसका सपना होता है कि उसका खुद का अपना घर हो
जिसके नीचे रहकर वह अपना जीवन निर्वहन कर सकें। इन्हीें भावनाओं को कुछ साइबर ठग भुनाने में जुटे हुए हैं। जिले में प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर साइबर ठगों का एक गिरोह सक्रिय है जो जरुरतमंद पात्र लोगों को अपनी नायब ठगी का शिकार बना रहे हैं। अब तक जिले में इन साइबर ठगों के झांसे में आकर दर्जनों लोग इस ठगी में अपनी खून -पसीने से बचायी गई कमाई की राशि को गंवा चुके हैं और अब गई रकम को वापस पाने की चाह में थाने, चौेकियों से लेकर अफसरों के दफ्तरों में जाकर न्याय की खातिर गुहार लगा रहे हैं। जिला मुख्यालयों पर आने वाले पीड़ितों की संख्या काफी अधिक है। जिला डूडा कार्यालय के प्रभारी कौशल कुमार ने बताया कि साइबर ठगी के कई मामले सामने आने पर डूडा विभाग ने आमजन के लिए एक अपील जारी की है। जिसमें लोगों से सावधान रहने को कहा गया है। अपील में साफ किया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थियों को निशुल्क योजना का लाभ दिलाया जाता है। इसके बदले किसी तरह का शुल्क या पंजीकरण कराने के बदले कोई भी राशि नही ली जाती है। योजना का लाभ पाने के लिए केवल आवेदन एवं वैद्य दस्तावेज जमा कराने की जरुरत है। पात्र होने एवं मानकों को पूरा करने पर ही पात्रता सूची में आने पर ही योजना का लाभ दिया जा सकता है। इसलिए किसी के बहकावे में न आएं। किसी तरह की परेशानी हो तो सीधे डूडा कार्यालय कलेेक्टट या नगर पालिका एवं संबंधित नगर पंचायत कार्यालय में जाकर इसकी जानकारी कर लें। किसी को इसके बदले कोई रुपया न दें। यदि कोई रुपयों की मांग कर रहा है तो इसकी सूचना भी दे दें।
फोन कॉल आने पर हो जाएं सतर्क
यदि आपने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए योजना में अपना पंजीकरण कराया है तो आप सावधान हो जाएं। पीएम आवास के नाम पर कुछ लोग भोले-भाले लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं। साइबर ठग लोगों से ठगी करने के नए-नए तरीके तलाशते रहते हैं। कभी लोन देने के नाम पर तो कभी कौन बनेगा करोड़पति तो कभी लकी ड्रा के नाम पर तो कभी उसके परिचित की बीमारी के नाम पर लोगों को अपना ठगी का शिकार बना रहे हैं। इन दिनों साइवर ठगों ने प्रधानमंत्री आवासीय योजनाओं के लाभार्थियों को अपना शिकार बना रहे हैं।
लाभार्थियों का डाटा कर लेते हैं चोरी
साइवर ठग पीएम आवास योजना के लिए आवेदन करने वाले पात्र लाभार्थियों का डेटा निकाल लेते हैं। आवेदन से सारी जानकारी जुटाने के बाद लाभार्थी के दिए गए मोबाइल नंबर पर फोन करते हैं। खुद को यह लोग लखनऊ सचिवालय अथवा प्रधानमंत्री आवास योजना कार्यालय से जुृड़ा होना बताते हैं। बात आगे बढ़ाते हुए लोगों का विश्वास जीतने के लिए पात्र लाभार्थी के परिवार की निजी जानकारियां बताते हैं फिर उन्हें पंजीकरण के नाम पर बरगलाकर उनसे फोन पे, पेटीएम या यूपीआई के माध्यम से अपने दिए गए नंबरों पर पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं। कुछ देर तक प्रोसेसिंग बताकर उन्हें टहला दिया जाता है तो उसके बाद संबंधित फोन पर अभद्रता शुरू हो जाती है। ऐसे में पीड़ित ठगी में गई रकम को वापस पाने एवं न्याय पाने के लिए चकरघिन्नी बना रहता है।