दिव्य दर्शन: एक ऐसा धाम, जहां बन जाते हैं सारे बिगड़े काम
अलीगढ़ । जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर गभाना के कन्होई स्थित श्री सिद्धनाथ भुमियां बाबा आश्रम की ख्याति आस-पास ही नहीं जिले और प्रदेश के अलावा अन्य कई राज्यों तक जुड़ी हुई है। Lord Shankar के अवतार माने जाने वाले श्री सिद्धनाथ भुमियां बाबा भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं आैर उनकी मनोकामनाओं को सिद्ध करते हैं। प्राचीन मान्यता है कि बाबा के दरबार से कभी भी कोई खाली नहीं गया है। बाबा का आश्रम कस्बा गभाना के पास जीटी रोड पर बसे गांव कन्होई में दिल्ली-हावड़ा रेलवे लाइन के पास चमत्कारी बाबा की समाधि के रूप में विराजमान हैं। यहां प्रत्येक सोमवार को भक्तों का सैलाब बाबा की पूजा-अर्चना को उमड़ता है । भक्त अपनी मनोकामना लेकर बाबा के दरबार में आकर मत्था टेकते हैं और आर्शीवाद पाते हैं। श्रावण मास में तो बाबा के मंदिर पर दर्शनों को पहुंचने वाले भक्तों की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है।
बाबा के मंदिर का इतिहास
श्री सिद्धनाथ भुमियां बाबा आश्रम का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। यहां मान्यता है कि भुमियां बाबा कन्होई गांव के सहारे एक झोपड़ी में रहते थे और यहीं उनका एक कुंआ भी था । जहां बैठकर वे पूजा-अर्चना एवं तप किया करते थे । देश में अंग्रेजी हुकूमत के समय जब दिल्ली-हावड़ा रेलवे लाइन का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो बाबा के आश्रम के पास कुएं के ऊपर होकर रेलवे लाइन गुजरी। रेलवे अधिकारियों से बाबा के अनुयाईयों ने रेलवे लाइन को कुएं से अलग होकर बनाए जाने की मांग की, लेकिन वे नही माने और कुएं को पाटकर उस पर नई रेलवे लाइन बनाने का काम शुरू करा दिया। अगले दिन कुंए से रेलवे लाइन उखड़ी मिली। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। तमाम प्रयासों के बाद भी रेलवे के अधिकारी इस कुएं को नहीं पाट सके। फिर उन्होंने कुएं को बंद किए बिना ही लाइन डाल दी। फिर जैसे ही ट्रायल के लिए ट्रेन चली तो बाबा के चमत्कारी कुएं के पास आकर अचानक बंद हो गई । रेलवे अधिकारियों के लाख प्रयासों के बाद भी जब ट्रेन टस से मस न हुई तो उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने बाबा से क्षमा मांगते हुए उनकी पूजा-अर्चना की। जिसके बाद ट्रेन लाइन पर सरपट होकर दौड़ने लगी । तब से लेकर आज तक यहां से गुजरने वाली ट्रेनों के चालक दल से जुड़े सदस्य बाबा के इस आश्रम व कुएं के सामने श्रद्धा के साथ सिर झुकाकर जरूर जाते हैं । मंदिर में बाबा की समाधि के अलावा तमाम देवी -देवताओं के मंदिर भी बने हुए हैं । श्रावण मास में पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार को यहां विशाल मेला लगता है। जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का सैलाब बाबा के पूजन-अर्चन के लिए उमड़ पड़ता है।