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पहले बेचे दीपक, अब बच्चों को दे रही है निश्शुल्क कंप्यूटर की शिक्षा

- मेयर प्रशांत सिंघल ने किया शिक्षा छवि कंप्यूटर सेंटर का शुभारंभ

लोधा। कहते हैं कि मेहनत करने वालों की हार नहीं, दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ यदि इंसान किसी लक्ष्य को पाने के आगे बढ़ता है तो रास्ते में आने वाली परेशानियों को भी पीठ दिखाकर भागना ही पड़ता है।

ऐसी कहानी है सराय हकीम निवासी मुकेश कुमार की बड़ी बेटी की हैं, जिससे कठिन दौर व आर्थिक तंगी में हार नहीं मानी और मेहनत मजदूरी व दीए बेचकर एक नहीं दो नहीं बल्कि जरूरतमंद बच्चों के लिए तीन-तीन कंप्यूटर सेंटर खोलकर निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रही हैं। अब तक वह करीब एक हजार से अधिक बच्चों को निश्शुल्क कंप्यूटर की शिक्षा प्रदान करवा चुकी हैं।

सराय हकीम निवासी मुकेश कुमार पेशे से दर्जी हैं। परिवार की आर्थिक स्थित ठीक नहीं थी, वह बच्चों को शिक्षा दिलाने में असमर्थ थे। तब उनकी बड़ी बेटी स्वेता दक्ष ने मेहनत मजदूरी के साथ ही दीपावली पर दीपक बेचकर अपनी शिक्षा को जारी रखा।

पढ़ाई के साथ-साथ वह बच्चों को पढ़ाने लगी, धीरे-धीरे पैसा एकत्रित होने पर उन्होंने पहले शिक्षा छवि कंप्यूटर के नाम से कोचिंग सेंटर खोला, जिसमें गरीब, असमर्थ परिवारों के बच्चों को निश्शुल्क कंप्यूटर की शिक्षा देने लगी। फिर उन्होंने दूसरा कंप्यूटर सेंटर खोला।शुक्रवार को उन्होंने रोरावर क्षेत्र में नादा चौराहा स्थित तीसरा कंप्यूटर सेंटर खोला। जिसका शुभारंभ महापौर प्रशांत सिंद्यल व उनकी पत्नी पूजा सिंघल ने फीता काटकर किया।

इस मौके पर महापौर ने कहा कि दुनियां में जितने भी महान पुरूष हुए हैँ, उन्हें अपने जीवन में कभी न कभी संघर्ष करना पड़ा है। जीवन से जुड़ा संघर्ष एक ऐसा शब्द है, जिसके बिना कुछ भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को कठिन परिश्रम, प्रयास के साथ अक्सर संघर्ष भी करना पड़ता है। जीवन के किसी भी क्षेत्र से जुड़ा यह संघर्ष आपको आपकी मनचाही सफलता के करीब पहुंचाने का काम करता है।

उन्होंने स्वेता दक्ष की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि गरीबों को निश्शुल्क शिक्षा देने से बड़ा और कोई पुण्य कार्य जीवन में नहीं हो सकता है।

स्वेता दक्ष ने बताया कि यहां पर कंप्यूटर सेंटर खोलने का मुख्य उद्​देश्य ऐसे गरीब, असहाय बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा प्रदान कराना हैं, जो पैसों के अभाव में शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। वह अब तक एक हजार से अधिक बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा प्रदान कर चुकी हैं। उनका उद्​देश्य है कि वह हर जनपद में शिक्षा छवि के नाम से कंप्यूटर सेंटर खोलकर गरीब बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा प्रदान कर सकें।

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