रॉयल स्टार न्यूज : अलीगढ़ और गभाना क्षेत्र से इस समय की प्रमुख खबरें...

सामाजिक समरसता की मिसाल है इगलास पथवारी मंदिर

अलीगढ़। मातारानी के अनेक रूप हैं, जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। स्थानीय स्तर पर भी कुछ ऐसी देवियां हैं जिनके प्रति श्रद्धालुओं में अपार आस्था है। ऐसा ही कस्बा इगलास में गौंडा मार्ग पर प्राचीन पथवारी मंदिर है। मंदिर में वैभव लक्ष्मी, लांगुरा, भैरों बाबा, शीतला माता के भी दर्शन होते हैं। इगलास कस्बा में कोई भी शुभकार्य मैया के आशीर्वाद के बिना नहीं होता।

 

मंदिर का इतिहास

बुजुर्गों के अनुसार, मंदिर करीब 200 वर्ष से अधिक पुराना है। पहले मंदिर के आसपास जंगल था। सिर्फ एक मूर्ति स्थापित थी, जहां लोग पूजा करने आते थे। कुछ श्रद्धालुओं ने यहां चबूतरा बना दिया। बाद में भक्तों ने मैया के मठ का निर्माण कराकर चारदीवारी करा दी। धीरे-धीरे मंदिर का सुंदरीकरण होता चला गया और आज उस मठ के स्थान पर पथवारी मैया का भव्य मंदिर है। पथवारी मैया की क्षेत्र में विशेष मान्यता है दूर-दराज से लोग यहां दर्शन करने के लिए आते हैं।

मंदिर की विशेषता

मंदिर में मां वैभव लक्ष्मी का भी भव्य मंदिर है। मंदिर के शिखर पर ध्वज पताका फहराती है। अंदर गजब की नक्काशी की गई है। मंदिर पर अनुसूचित जाति के पुजारी हैं। मंदिर सामाजिक समरसता की मिसाल है। अष्ठमी व नवमी को मैया के छप्पन भोग लगाए जाते हैं। यहां दूर दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर पर कार्यक्रम की तैयारियां

नवरात्र में यहां नौ दिन तक मेला लगता है और हर दिन भक्तों को मैया के अलग रूप के दर्शन कराए जाते हैं। मंदिर को विद्युत चलती लाइटों व फूलों से सजाया गया है। मैया की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। महाकाल व बांके बिहारी के दर्शन कराए जाएंगे।

चार पीढिय़ों से मैया की सेवा कर रहे हैं। सच्चे मन से की गई कामना मैया पूरी करती हैं। नवरात्र में मेले लगता है। दूरदराज से लोग दर्शन करने आते हैं। भूरा सिंह, पुजारी

पथवारी मैया की ख्याति दूर-दराज तक फैली है। मैया अपने भक्तों की झोली भरती हैं। नवरात्र में यहां लाइन में लगकर दर्शन करने पड़ते हैं। मोहित अग्रवाल, भक्त

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!