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बचपन में ही देना चाहिए बच्चों को धर्म का ज्ञान : वृंदा किशोरी

-इगलास के गांव चंदफरी-हस्तपुर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
इगलास। क्षेत्र के गांव चंदफरी-हस्तपुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में बाल व्यास की युगल जोड़ी ने कई भगवत प्रसंगों पर प्रवचन करते हुए भगवान के चौबीस अवतारों, समुद्र मंथन, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव, विदुर प्रसंग व सती चरित्र की कथा का मार्मिक वर्णन किया। व्यास वृंदा किशोरी ने कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। माता-पिता की सेवा और प्रेम के साथ समाज में रहना ही धर्म का मूल है। बच्चों को धर्म का ज्ञान बचपन में ही देना चाहिए। अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को पांच वर्ष की उम्र में भगवान के साक्षात दर्शन मिल गए। ये जिंदगी सात दिन की है, पता नहीं कब बुलावा आ जाए और हमें जाना पड़े, इसलिए जीवन में किसी को दुख मत दो। जो दुसरों के दुख को समझता है वहीं मनुष्य है। भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है।


कथा श्रवण कराते हुए बृज किशोर महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने से कल्याण निश्चित है। भागवत में 18 हजार श्लोक, 12 स्कन्द और 335 अध्याय है जो जीव सात दिन में सम्पूर्ण भागवत का श्रवण करेगा वो अवश्य ही मनोवांछित फल की प्राप्ति करता है। राजा परीक्षित के कारण भागवत कथा पृथ्वी के प्राणियों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। समाज द्वारा बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं किंतु भगवान के नियम ना तो गलत हो सकते हैं और नहीं बदले जा सकते हैं। इस संसार में जन्म-मरण से मुक्ति भगवान की कथा ही दिला सकती है।

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