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बच्चे की प्रथम गुरु हाेती है मां : इंद्रेश उपाध्याय

अलीगढ़। खेरेश्वर स्थित गांव लोहसरा मार्ग पर चल रहे 108 कुंडीय महालक्ष्मी धन वर्षा महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा में गुरुवार को यज्ञाचार्य भरत तिवारी के सानिध्य में महायज्ञ हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर आहूति प्रदान करते हुए राष्ट्र में अमन व शांति की प्रार्थना की।

दाेपहर को हुई भागवत कथा में व्यास इंद्रेश उपाध्याय ने भक्त ध्रुव चरित्र की कथा प्रसंग सुनाते हुए कहा कि माता सुनीति ने अपने पुत्र को सभी सदगुण प्रदान किए जो एक गुरु अपने शिष्य को प्रदान करते हैं। इसी शिक्षा के बल से ध्रुव ने मात्र पाँच वर्ष की आयु में भगवान को प्राप्त किया। संसार में बच्चे की प्रथम गुरु मां होती है। जो उसको अच्छे बुरे की समझ बताती है। सामाजिक दायरे में रहने के गुर सिखाती है। उन्होंने कहा कि ध्रुव भक्ति का सागर है, वह धर्म और भक्ति के मार्ग पर चला। जब राजा उत्तानपाद की रानी ने ध्रुव को उनकी गोद से उठा दिया तो ध्रुव की माता सुनीति ने कहा कि बेटा यह तो सांसारिक मोह माया है। पिता की गोद से भी बड़ी गोद तो परमात्मा की है, जिसने सृष्टि की रचना की है। उसके लिए सभी समान है। मां की प्रेरणा से ध्रुव को ज्ञान हुआ। उन्होंने कहा कि सांसारिक जीव को संसार मं रहते हुए नैतिक नियमों का पालन करते हुए ईश्वर की शरण में जाने के लिए प्रेम और भक्ति का मार्ग चुनना चाहिए। इन दोनों मार्गों से ही संसार को जीता जा सकता है। प्रेम मौन मूक जीवों को भी आपके पक्ष में कर लेता है। निष्काम भक्ति आपको ईश्वर की शरण में जाने का सुगम मार्ग खोल देती है। जीव परमात्मा का अंश है, उसे पाने के लिए सिर्फ पूजा-अर्चना करना काफी नहीं है। अनुराग और भक्ति के साथ जीव में दया, प्रेम, करूणा, ममता, स्नेह और समर्पण का भाव भी होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हम माता-पिता सदैव आदर व सेवा करनी चाहिए, मां के ऋण तो साक्षात भगवान भी नहीं चुका पाते तो आम मनुष्य कैसे चुका सकता है। उन्होंने कहा कि जो फल जप-तप से प्राप्त नहीं हो सकता है, वह माता-पिता की सेवा से प्राप्त हो जाता है। आयोजन में अध्यक्ष ठा. नरेश सिंह, मुख्य यजमान धनंजय पंडित, हाथरस सांसद धर्म पत्नी रजनी दिलेर, शशि सारस्वत, एडवोकेट नीरज शर्मा, प्रमोद गौड़, मीडिया प्रभारी आशू पंडित, शेखर, युवराज रावत, विवेक पंडित, नंदू ठाकुर, वेदप्रकाश शर्मा, सौरभ भारद्वाज, आचार्य कृष्ण गोपाल, आचार्य हिमांशु शास्त्री, आचार्य वेद प्रकाश शर्मा, मुकंद भारद्वाज, मयंक अग्रवाल, दीपक भारद्वाज, मोहन शर्मा आदि मौजूद रहे।

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