खुद उपचार को तरस रहा नगला पदम का आयुर्वेदिक अस्पताल
- डॉक्टर के मौजूद न रहने पर ग्रामीणों ने किया हंगामा, उपचार को भटकते हैं मरीज
चंडौस। क्षेत्र के गांव नगला पदम में कहने को राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल है। फिर भी डॉक्टरों व अन्य स्टाफकर्मियों के न आने से यह अस्पताल मरीजों के उपचार करने के बजाय खुद उपचार के लिए तरस रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से अनजान बने बैठे हैं। जिसको लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
नगला पदम की लगभग 15000 की आबादी है। जहां पर ग्रामीणों के उपचार के लिए राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल है। लेकिन अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती के बाद भी अस्पताल महीने में एक या दो दिन ही खुलता है। जिससे ग्रामीणों को बेहतर उपचार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है, या फिर उन्हें निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। गुरुवार को अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी करते हुए हंगामा किया।
ग्रामीणों के अनुसार अस्पताल में शासन की ओर से डॉक्टर की तैनाती कर रखी है, बाबजूद न तो डॉक्टर अस्पताल पहुंचते हैं और न ही अस्पताल को खोला जाता है। लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए कई किलोमीटर दूर चंडौस सीएचसी या खैर जाना पड़ता है। वहीं लोगों को निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। जिससे ग्रामीणों को परेशानी तो झेलनी ही पड़ती है्, बल्कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ता है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमित अस्पताल को खुलवाने व डॉक्टरों की तैनाती की मांग की है। वहीं मामले में नगला पदम विकास समिति अध्यक्ष अमित चौहान एवं महासचिव सूरज नंदराना ने एसडीएम गभाना व मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की है। इस दौरान रामवीर सिंह, दुष्यंत गुप्ता, जितेंद्र सिंह, सुशील सिंह, सोहन सिंह आदि लोग मौजूद रहे।