भाजपा की टिकट में देरी से दावेदारों की धुकधुकी बढ़ी
– नामांकन के अंतिम दो दिन शेष बचे, कुछ ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का बनाया मन
– सत्तारूढ़ पार्टी को कार्यकर्ताओं की नाराजगी चुनाव में पड़ सकती है भारी
अलीगढ़ । जिले में दूसरे चरण में 11 मई को होने वाले निकाय चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन अभी तक नगर निगम समेत सभी 18 निकायों में सत्तारूढ़ भाजपा समेत अन्य दलों ने अब तक अपने पत्तों को नहीं खोला है। दावेदारों की टिकट की घोषणा न होने से उनकी धुकधुकी बढ़ गई है। समर्थक भी टिकट वितरण में हो रही देरीे से चिंतित बने हुए हैं। रणनीतिकारों का मानना है कि टिकट में देरी का खामियाजा चुनाव में भाजपा को उठाना पड़ सकता है। टिकट की घोषणा में देरी होने से जहां दावेदारों की चिंता बढ़ी हुई है तो दूसरी ओर कुछ दावेदारों को टिकट न मिलने से विरोध मे चुनाव में उतरने की संभावनाओं को देखते हुए भीतरघात होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। जिले में अधिकांश लोगों की निगाहें महानगर में महापौर पद के प्रत्याशी के नाम की घोषणा पर टिकी हुई हैं। हालांकि किसी भी प्रत्याशी के नाम पर आम राय नहीं बन पा रही है, जिससे टिकट बंटवारे से पहले ही पार्टी में अंदरूनी कलह सामने आ सकती है। इसका लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा को उठाना पड़ सकता है। नगर निगम के अलावा जिले की अतरौली एवं खैर नगर पालिका एवं जिले की सभी 15 निकायों में अब तक अध्यक्ष, सदस्य पद के दावेदारों के नामों की घोषणा नहीं हो सकी है। खासकर गभाना, चंडौस, पिसावा, मडराक, बरौली, जवां -सिकंदरपुर, चंडौस नगर पंचायतों में पहली बार अध्यक्ष एवं सदस्य पदों का चुनाव हो रहा है। इसको लेकर पहली बार में ही चुनाव लड़ने वाले दावेदारों की संख्या कहीं अधिक है। आलम यह है कि अध्यक्ष से लेकर सभासद पद के लिए एक-एक सीट पर कई-कई दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। इससे यहां चुनाव बेहद दिलचस्प नजर आएगा। जैसे -जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही हैं, वैसे-वैसे चुनाव मैदान में उतरने वाले दावेदारों के चेहरे सामने आने लगे हैं। चुनाव मैदान में उतरने वाले दावेदारों में से अधिकांश ने सत्तारूढ़ भाजपा से टिकट की मांग की है। संभावना है कि पार्टी ऐन वक्त पर टिकट की घोषणा कर विरोध को कम करने के प्रयास में है। इसी रणनीति को लेकर पार्टी हाईकमान टिकट वितरण में देरी कर रहा है। प्रत्याशियों की जनता के बीच में छवि एवं चुनाव में जीतने की संभावनाओं पर गहन मंथन किया जा रहा है। भाजपा के अलावा सपा, बसपा, आप एवं कांग्रेस पार्टी से भी नगर पालिका एवं नगर पंचायतों मे टिकटों का एलान नहीं हो सका है। हालांकि बसपा, सपा एवं आप ने मेयर पद के लिए अपने प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। अभी भाजपा एवं कांग्रेस के प्रत्याशियों को लेकर कसमकश का दौर चल रहा है। उधर, पार्टी स्तर से टिकट वितरण में हो रही देरी को लेकर कुछ दावेदारों ने निर्दलीय या किसी दूसरे दल से चुनाव मैदान में उतरने का मन बना लिया है। जिससे चुनाव में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा साबित होेने जा रहा है। प्रत्याशियों को मतदाताओं के पास जाने से पहले ही अपने लोगों को चुनाव मैदान में उतरने से रोकने एवं उन्हें मनाने में गुजारना होगा। इससे उनकी चुनावी तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं। उधर, टिकट न मिल पाने की दशा में पार्टी के कुछ नेताओं के दूसरे दलों में जाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। संभावना है कि रविवार दोपहर तक भाजपा जिले के सभी 18 नगरीय निकायों में अपने दावेदारों के नामों की घोषणा कर सकती है।
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