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मां ने निभाया फर्ज, बेटे के भविष्य काे लेकर गिरवी रख दिए कानों के कुंडल

- खैर स्थित नवोदय स्कूल मे दाखिला दिलाने को मां ने मजबूरी में उठाया कदम

लोधा । भगवान के बाद मां को दूसरा दर्जा दिया गया है। बच्चों की प्रथम गुरु भी मां ही होती है। ममता की प्रतिमूर्ति कहे जाने वाली मां अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए किसी भी हद तक गुजरने के लिए हमेशा तैयार रहती है। भले ही उसके लिए उसे चाहें जो भी कीमत अदा करनी पड़े। ऐसे ही एक मां ने बेटे के भविष्य को संवारने के लिए उसे स्कूल में दाखिला दिलाने को फीस जमा कराने को अपने कानों के कुंडल गिरवी रख दिए। मां के इस कदम की हर ओर सराहना हो रही है। मामला लोधा क्षेत्र के सलेमपुर माफी से जुड़ा हुआ है। गांव के ही मजदूरी करने वाले बृजेश कुमार के तीन बच्चे हैं। जिसमें सबसे बड़ा बेटा रोहित कुमार एक निजी स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ता है। बालक की मां संतोष देवी चाहती हैं कि उनका होनहार बेटा पढ़-लिखकर माता-पिता का नाम रोशन करे। इसको लेकर वे रोहित को हरिदासपुर के एसकेडी पब्लिक स्कूल में पढ़ाने के साथ ही यहां प्रबंधक योगेश कुमार के निर्देशन में नवोदय विद्यालय में प्रवेश पाने के लिए तैयारी करा रही थीं। पिछले दिनों नवोदय विद्यालय की परीक्षा के बाद परिणाम घोषित हुआ तो उम्मींदों के मुताबिक छात्र रोहित कुमार का चयन हो गया। बेटे के चयन की खुशी में पिता बृजेश कुमार एवं मां संतोष देवी खुशी से झूम उठी। हालांकि स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए फीस की जरुरत थी, लेकिन यह फीस माता-पिता के पास नहीं थी। ऐसे में दंपती ने गांव के कई लोगों से मदद मांगी, लेेेकिन कोई मददगार सामने नहीं आया। ऐसे में परेशान मां को बेटे के भविष्य की चिंता सताने लगी। इस पर स्कूल में दाखिले के लिए जब रुपयों का इंतजाम न हुआ तो उसने परेशान होकर अपने कानों के सोने के कुंडल एक सुनार के पास गिरवी रखे तब रुपये उधार लेकर बेटे रोहित की स्कूल में जाकर फीस जमा करायी। संतोषी देवी के इस प्रयास की पूरे गांव में सराहना हो रही है।

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