बाबा कांशीराम को जयंती पर दी श्रद्धांजलि
इगलास। प्रथम श्याहपोश जनरल स्वतंत्रता संग्राम सैनानी बाबा कांशीराम ने काव्य के माध्यम से धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और जनसाधारण की भाषा में चेतना का संदेश दिया। उन्होंने लाला लाजपत राय और सरदार अजीत सिंह जैसे देशभक्तों के साथ मिलकर आजादी के लिए अपना अधिकांश जीवन जेलों में बिताया। उक्त बातें बाबा कांशीराम की 142 वीं जयंती पर परोपकार सामाजिक सेवा संस्था के अध्यक्ष जतन चौधरी ने कहीं। उन्होंने बताया कि बाबा कांशी ने कसम खाई थी कि जब आजादी मिलने तक वह काले कपड़े ही पहनेंगे। इसलिए स्वतंत्रता सेनानियों में वह स्याहपोश जरनल के रूप में भी जाने जाते थे। अंग्रेजी हुकूमत की यातनाओं को सहते हुए 15 अक्टूबर 1943 को स्वतंत्रता संग्राम की ज्योति में विलीन हो गए थे। इस अवसर पर जय भारद्वाज, हार्दिक, अंश, जतिन,करन, माइकल, सूरज, साधना आदि थे।