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आरोपियों के घरों पर बुलडोजर न चलने तक मां-बेटी के शवों का अंतिम संस्कार न करने पर अड़े ग्रामीण

- कई घंटों की वार्ता के बाद राजस्व राज्यमंत्री के आश्वासन पर माने ग्रामीण

अलीगढ़। गौंडा के कैमथल की मढ़ी में सोमवार को पति के त्रयोदशी संस्कार की रस्मों में व्यस्त महिला और उसकी बेटी की परिवार के लोगों ने ईंट पत्थर व लाठी डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर डाली थी। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद महिला व उसकी बेटी के शवों को भाई भोला टप्पल के गांव हर्जीगढ़ी सूरजमल लेकर पहुंचे। मां-बेटी के शवों को देकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया। ग्रामीणों व परिजनों ने शवों ट्रैक्टर-ट्रॉली में रख कर आरोपियों की गिरफ्तारी न होने व घरों पर बुलडोजर न चलने तक अंतिम संस्कार न करने का ऐलान किया।

सूचना पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। कई घंटों के मान मनोब्बल के बाद भी ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। सूचना पर पहुंचे राजस्व राज्यमंत्री अनूप प्रधान ने ग्रामीणों को आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन देकर समझाया-बुझाया। तब  कहीं जाकर मां-बेटी का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।यह था पूरा मामला

गौंड़ा के गांव कैमथल की मढ़ी निवासी सुरेश चंद्र दिल्ली में डीटीसी चालक थे और वह पत्नी मुकेश देवी तथा दत्तक पुत्री प्रियंका के साथ नई दिल्ली के सागरपुर इलाके में अपना मकान बनाकर रह रहे थे। सुरेश चंद्र की शादी के दस साल भी कोई संतान न होने पर उन्होंने अपने साले भोला निवासी हर्जीगढ़ी टप्पल से बेटी गोद ली थी। सुरेश के भाईयों और भतीजों काे इस बात पर एतराज था।

सुरेश ने अपने भाईयों से लगभग रिश्ता खत्म कर दिया था और उन्होंने गांव आना-जाना भी बंद कर दिया था। बीती 30 अगस्त को सुरेश चंद्र की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। पत्नी मुकेश देवी व दत्तक पुत्री प्रियंका उनका दिल्ली में ही अंतिम संस्कार करना चाहते थे।

लेकिन परिजन जबरन सुरेश चंद्र के शव को गांव ले आए और अंतिम संस्कार कर दिया। सोमवार को मुकेश देवी पति के त्रयोदशी संस्कार की रस्मों को पूरा करा रही थी। इसी दौरान महिला का देवरों व उनके बेटों से संपत्ति को लेकर विवाद हो गया। जिस पर हमलावारों ने 55 वर्षीय मुकेश देवी व उसकी 22 वर्षीय बेटी प्रियंका की लाठी-डंडों से मारपीट कर व ईंट से कुचलकर हत्या दी।संपत्ति हड़पने को लेकर दिया घटना को अंजाम

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार गांव में सुरेश के हिस्से में चार बीघा जमीन थी। वहीं दिल्ली में उनका जो मकान है, उसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ के लगभग बताई गई है। भाई व भतीजों को उम्मीद थी कि उनके पास कोई संतान नहीं है तो संपत्ती उन्हें ही मिलेगी, लेकिन उन्होंने प्रियंका को गोद ले लिया तो उनकी उम्मीदें खत्म हो गई। संपत्ति को हड़पने के लिए आरोपियों ने इस घटना को अंजाम दे दिया।

5 घंटे चली पंचायत, आरोपियों पर कार्रवाई के लिए तीन दिन का दिया समय

मां-बेटी के शव काे पोस्टमार्टम के बाद मायका पक्ष के लोग जब टप्पल के गांव हर्जीगढ़ी सूरजमल में लेकर पहुंचे तो परिजनों व ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी व घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई न होने तक मां-बेटी के शवों का अंतिम संस्कार न करने का ऐलान कर दिया। जानकारी पर एसपी देहात पलास बंसल, एसडीएम खैर दिग्विजय सिंह समेत आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए।

अधिकारियों ने गुस्साएं ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह वह अपनी मांगों पर अड़े रहे। करीब पांच घंटे की पंचायत के बाद मौके पर पहुंचे राजस्व राजस्व राज्यमंत्री अनूप प्रधान ने तीन दिन के अंदर आरोपियों पर कठोर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

तभी कहीं जाकर ग्रामीण मां-बेटी के शवों का अंतिम संस्कार करने को राजी हुए। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा कई थानों का पुलिसफोर्स मौजूद रहा।

मां-बेटी को एक ही चिता पर लेटा देख आंखें हुई नम

मां-बेटी को एक ही चिता में अंतिम संस्कार किया गया। बहन और बेटी को भोला ने मुखाग्नि दी। मां- बेटी एक ही चिता में जली तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गई। सभी का यही कहना था कि आरोपियों के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई की जाए कि इस तरह का अपराध करने के कोई सोच भी न सके।

आरोपियों की तलाश जारी

एसपी देहात पलाश बंसल ने बताया कि ग्रामीणों को समझा बुझाकर शवों का अंतिम संस्कार कराया गया है। आरोपियों की तलाश में टीम जुटी हुई हैं। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।

 

संपत्ति हड़पने के लालच में मां-बेटी की पीट-पीटकर की हत्या

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