क्यों बढ़ रहे सड़क हादसे , नौसिखिए हाथों में है वाहन का संचालन
– हादसों के लिए तेज रफ्तार भी बन रही है जिम्मेदार
– अभिभावक भी नहीं दे रहे ध्यान, आरटीओ व ट्रैफिक पुलिस भी नहीं करती कार्रवाई
अलीगढ़। शहर से लेकर देहात तक जिन हाथों में कलम और किताब होनी चाहिए उन नौसिखिए हाथों में अब स्कूटी, बाइक व कार आदि वाहन दिखाई पड़ते हैं। जो न केवल प्रमुख बाजारों व सड़कों पर बल्कि हाईवे जैसी सड़क पर भी हवा से बातें करते एवं तेज रफ्तार भरते हुए देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं इन चालकों में से अधिकांश के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं होता है। ऐसे में जिले भर में आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और लोग असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं।
पाबंदी फिर भी दौड़ा रहे वाहन
मोटर व्हीकल एक्ट में नाबालिग बच्चों के वाहन संचालित करने पर कड़ी पाबंदी है। केवल 16 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नाबालिग बिना गेयर वाला स्कूटर चला सकते हैं। उसके लिए भी अभिभावक की मर्जी से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना जरूरी है। ऐसे में यदि नाबालिग के वाहन संचालन के दौरान कोई हादसा होता है तो उसके लिए उनके अभिभावकों को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई तय है। सब कुछ जानकार भी अभिभावक लगातार इसकी अनदेखी कर रहे हैं। लिहाजा सड़क हादसे भी बढ़ रहे हैं।
तीन साल में सिर्फ 146 आवेदन
आरटीओ दफ्तर के रिकॉर्ड को मानें तो बीते साल में 16 वर्ष की आयु में बिना गेयर वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेेंस बनवाने वाले आवेदकों की संख्या तीन साल में मात्र 148 रही है। इस साल भी अब तक 28 आवेदकों ने लाइसेंस के लिए आवेदन कराया है। जबकि शहर से लेकर देहात तक तमाम नाबालिगों के असुरक्षित हाथों में कार-बाइक, स्कूटी आदि वाहन देखे जा सकते हैं और बिना किसी रोक-टोक के ई-रिक्शा व ऑटो का संचालन भी कर रहे हैं।
एक पर भी कार्रवाई नहीं
यातायात पुलिस व आरटीओ विभाग जिले भर में चेकिंग अभियान चलाता है, लेकिन आज तक कोई भी नाबालिग व फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस धारक नहीं पकड़ा जा सका है। इतना ही नहीं साधारण लाइसेंस पर भी तमाम चालक व्यवसायिक वाहन चला रहे हैं। पकड़े जाने पर सिर्फ चालान व जुर्माने की कार्रवाई कर इतिश्री कर ली जाती है।
पब्लिक बोल …
नाबालिगों के वाहन संचालन पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। इससे होने वाले हादसों पर भी ब्रेक लगेगा।
– उमेश चंद्र पाठक, एडवोकेट
वर्जन
नौसिखिए वाहन चालकों के लिए समय-समय पर वाहन चेकिंग अभियान व जागरूकता अभियान चलाया जाता है। पकड़े जाने पर 5000 रुपये का चालान किया जाता है। इस साल 50 से ज्यादा मामले आए हैं। सभी से जुर्माना वसूला गया है।
– फरीदउद्दीन, आरटीओ प्रवर्तन