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13 साल की बेटी ने पिता को दी मुखाग्नी, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

अलीगढ़। जिस पिता के कंधों पर बेटियां खेलकर बड़ी हुई। सोमवार को उसी पिता की अर्थी को उन्होंने कंधा भी दिया और एक बेटी ने मुखाग्नी देकर अंतिम विदाई भी दी। बेटियों को पिता की अर्थी कंधे पर ले जाते देख हर किसी की आंखें नम हो गई। हिंदू धर्म में आम तौर पर पुरूष प्रधान समाज में बेटा ही अर्थी को कंधा देता हैं जबकि बेटियों को शमशान में प्रवेश वर्जित रखा गया है। लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसे हालात भी होते हैं जब बेटियों को न सिर्फ अर्थी को कंधा देना पड़ता है बल्कि उन्हें मुखाग्नी देने से लेकर अंतिम संस्कार की सारी रस्में भी अदा करनी पड़ती हैं। ऐसी ही हृदय विदारक घटना सोमवार को देखने को मिली। जब दुबे के सराय में पिता की बीमारी से मौत हो जाने पर बेटियों ने मिलकर बेटा का धर्म निभाते हुए न सिर्फ अर्थी को कंधा दिया। बल्कि सबसे छोटी 13 वर्षीय बेटी ने पिता को मुखाग्नी देकर अंतिम विदाई भी दी। जिसे देख हर किसी की आंखें नम हो गई।दुबे का सराय निवासी राजकुमार मेहनत मजदूरी करके परिवार को चलाते थे। उनकी तीन बेटियां 18 वर्षीय रति, 16 वर्षीय गौरी व 13 वर्षीय चित्रा हैं। करीब नौ माह पूर्व राजकुमार को मुंह का कैंसर की बीमारी का पता चला। आर्थिक स्थित ठीक न होने के चलते पत्नी व बेटियों ने उनके बेहतर उपचार के लिए घर में जो कुछ भी था सब कुछ बेच दिया। जिसके बाद सोमवार को उनकी मौत हो गई। जिस पर तीनों बेटियों ने बेटा का धर्म निभाते हुए पिता की अर्थी को न सिर्फ कंधा दिया बल्कि छोटी बेटी चित्रा ने मुखाग्नी देकर समाज को यह बता दिया कि बेटियां भी किसी स्थिति में बेटों से कम नहीं होती है। बेटियां भी बेटों के सारे फर्ज अदा कर सकती है। यह मंजर देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू छलक पड़े।

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