जंग–ए–आजादी के नायक मंगल पांडे को किया याद
रॉयल स्टार न्यूज, अलीगढ़। 1857 की क्रांति की 166वीं वर्षगांठ पर परोपकार सामाजिक सेवा संस्था के तत्वावधान में गांव तोछीगढ़ में आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले समस्त क्रांतिकारियों के बलिदान को स्मरण करते हुए ग्रामीण बच्चों ने तिरंगे को साक्षी मानकर देशसेवा का संकल्प लिया।

संस्था के अध्यक्ष जतन चौधरी ने कहा कि 29 मार्च 1857 को महान क्रांतिकारी मंगल पांडे ने ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का बिगुल फूंका था। आज ही के दिन उन्होंने बैरकपुर छावनी के परेड ग्राउंड में खुले रूप से अपने साथियों के समक्ष क्रांति का आवाह्न किया था। उनके द्वारा आरंभ किए गए विद्रोह से पूरे देश में आजादी की लड़ाई की चिंगारी देखते ही देखते भीषण आग में बदल गई थी।
मंगल पांडे ने प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मंगल पांडे ईस्ट इंडिया कम्पनी की 34वीं बंगाल इन्फेंट्री के सिपाही थे। उनके विद्रोह के कारण अंग्रेज अधिकारियों में दहशत फैल गई थी। क्रांति को दबाने के इरादे से अंग्रेज सरकार ने मंगल पांडे को गिरफ्तार कर त्वरित कार्रवाई करके 6 अप्रैल 1857 को मंगल पाण्डेय का कोर्ट मार्शल कर 8 अप्रैल को उन्हें फ़ांसी दे दी गयी थी।
लेकिन फांसी के बावजूद भी मंगल पांडे देशभर के समस्त क्रांतिकारियों के लिए क्रांति के अग्रदूत साबित हुए और देश भर में क्रांति की अग्नि भड़क उठी थी।
मंगल पांडे द्वारा लगायी गयी विद्रोह की यह चिंगारी बुझी नहीं। एक महीने बाद ही 10 मई 1857 को मेरठ की छावनी में कोतवाल धनसिंह गुर्जर के नेतृत्व में बगावत हो गयी। और इसी क्रम में झांसी, दिल्ली, बल्लभगढ़, फिरोजपुर, लखनऊ, कानपुर व अयोध्या आदि जगहों पर क्रांति का आगाज हुआ। देशवासी आज भी मंगल पांडे को जंग–ए–आजादी के नायक के रुप में याद करते हैं। इस अवसर पर प्रशान्त ठैनुआ, पंकज कुमार, लखन सिंह, डब्बू शर्मा, अंकित कुमार, अमरजीत सिंह, चिंटू चौधरी, सूरज चौधरी, कपिल, साधना, तान्या वैदेही आदि मौजूद रहे।