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जब तक सूरज चांद रहेगा, सचिन तेरा नाम रहेगा… के नारों से गूंजा शहीद का गांव

  • तिरंगे में लिपटकर आया अलीगढ़ का लाल, शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, किए श्रद्धासुमन अर्पित
  • प्रभारी मंत्री ने प्रदेश सरकार की ओर से 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं एक सदस्य काे सरकारी नौकरी देने किया ऐलान

अलीगढ़ । जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवादियों एवं सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में शहीद हुए थाना टप्पल क्षेत्र के नगलिया गौरोला के सपूत सचिन लोर को अंतिम श्रद्धांजलि देने को अपार जनसैलाव उमड़ पड़ा। सभी की आंखें नम थीं और आतंकवादियों के कृत्य की निंदा कर रहे थे। शहीद का पार्थिव जैसे ही दिल्ली के रास्ते गांव के पहले टप्पल इंटरचेंज पहुंचा तो वहां सैंकड़ों लोगों ने उसकी आगवानी की। फिर जुलूस की शक्ल में वाहनों के साथ पॅैतृक गांव लेकर पहुंचे। इस दौरान वंदे मातरम…, भारत माता की जय… जब तक सूरज चांद रहेगा, सचिन तेरा नाम रहेगा… के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। गुस्साए लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के भी नारे लगाए। आतंकियों को प्रश्रय देने पर लोगों में भारी आक्रोश दिखाई पड़ा। उधर, डीजे पर गूंज रहे आजादी के तरानों को सुनकर लोगों की अश्रुधारा बह उठी । हर कोई अपने सपूत की एक झलक पाने एवं अंतिम श्रद्धांजलि देना चाहता था । जो पास नहीं जा सका उसने दूर से ही अपने मन के भावों से सचिन को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

आतंकियों से लोहा लेते हुए दिया बलिदान

जम्मू-कश्मीर के राजौरी इलाके में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में सेना के दो कैप्टन सहित पांच जवान घायल हुए थे। यह सभी गुरुवार को वीरगति को प्राप्त हुए थे। जिसमें टप्पल के गोरौला निवासी पैरा कमांडो सचिन लौर भी शामिल थे। 24 वर्षीय सपूत सचिन लौर का पार्थिव शरीर शुक्रवार को पहले दिल्ली पहुंचा जहां गारद की सलामी के बाद पार्थिव शरीर को पैतृक गांव लाया गया। जहां देर शाम पूरे सैन्य एवं राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।सपूत को तिरंगे में लिपटा देख हुई आंखें नम
शहीद का तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को लेकर सेना की एक टुकड़ी गांव पहुंची तो शहीद के माता-पिता, भाई-भाभी, बहन समेत तमाम परिजन विलाप करने लगे। कई तो सुधि-बुधि खो बैठे और उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। इस दौरान गांव के अलावा आस-पास के गांवों के हजारों लोग अपने लाल को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़े।

जिले के प्रभारी एवं प्रदेश केे गन्ना एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, राजस्व राज्यमंत्री अनूप प्रधान, सांसद सतीश गौतम,  भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के अलावा डीएम इंद्र विक्रम सिंह, एसएसपी कलानिधि नैथानी, सीडीओ आकांक्षा राना, एसपी देहात पलाश बंसल, एसडीएम खैर दिग्विजय सिंह समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारियों ने भी नम आंखों से शहीद को श्रद्धाजंलि अर्पित की।बोले पिता, बेटा सचिन मुझे तुझ पर नाज, तूने गर्व से सीना चौड़ा कर दिया

पिता रमेशचंद्र ने सपूत सचिन की शहादत को याद करते हुए कहा कि बेटा मुझे तुझ पर नाज है। तूने गर्व से मेरा सीना चौड़ा कर दिया है। वे सचिन को याद करते हुए पुरानी यादों में खो गए। बोले, सचिन जब कक्षा छह में पढ़ता था, तभी से उसके मन में देश की सेवा करने की थी। वह कहता था कि वह एक दिन सेना में भर्ती होगा और कमांडों बनेगा। फिर दुश्मन और उग्रवादियों का कड़ा सबक सिखाएगा। सचिन में कभी किसी को लेकर खौफ नहीं था। यहीं कारण था कि जब भी छुट्टी पर गांव आता था तो रोजाना दौड़ लगाने जाता था। पिता को बस इतना गम था कि वो बेटे को शादी का सेहरा बांधे नहीं देख सके। आठ दिसंबर को सचिन की बारात जानी थी, लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर था। सचिन की मथुरा की मांट तहसील के गांव जैसेथा गांव से होनी थी। एक दिन पहले ही कार्ड छप कर आए थे, घर में शादी की खरीदारी के साथ ही कार्ड बांटे जाने की तैयारी चल रही थी।दूसरी बार मिला शहादत का अवसर

सचिन का अंतिम संस्कार उनके रिश्ते के ताऊ मांगेराम की समाधि के पास ही किया गया। मांगेराम भी वर्ष 1999 में हुए कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे। परिवार को दूसरा अवसर मिला जब उनका एक और सदस्य देश की सेवा करते हुए शहादत को प्राप्त हो गया। ताऊ मांगेराम के पास ही सचिन को भी पूरे सैन्य एवं राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उधर, घर पर परिजनों को सांत्वना देने के लिए लोगों को तांता लगा हुआ है।बहनों ने सलामी देकर दी भाई को विदाई

सचिन के पार्थिव शरीर को जब तिरंगे में लपेटकर अंतिम यात्रा के लिए ले जाया जा रहा था तब वहां मौजूद हर किसी की आँखें नम थी। परिजन सचिन की यादों को ताजा करते हुए बेहाल थे और विलाप कर रहे थे। सचिन की सभी बहनें भी अंतिम विदाई देने पहुंची थी। उन्होंने चचेरी, तयरेी बहनों के साथ भाई को सलामी (सैल्यूट ) देकर भावभीनी विदाई दी। उन्होंने कहा कि सचिन हमें नाज है कि तुम्हने राखी और भाईदूज के संकल्प को पूरा किया और देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। सचिन को गारद की सलामी के बाद नेवी में तैनात अफसर विवेक लौर ने चिता का अग्नि दी। इस बीच भारत माता के सचिन की शहादत के जयकारे गूंज रहे थे।

प्रदेश सरकार की ओर से परिजनों को 50 लाख की अनुग्रह राशि जारी
प्रदेश केे गन्ना एवं चीनी मिल एवं जिले के प्रभारी मंत्री चौधरी लक्ष्मीनाराण ने कहा कि यह दुखद क्षण है। जिस तरह आतंकेियों ने इस घटना को अंजाम दिया है। सचिन लौर का बलिदान खाली नहीं जाएगा। हमें और प्रदेश भर के सभी लोगों को सचिन की शहादत पर नाज है। सचिन की शहादत युवाओं को प्रेरणा देने का कार्य करेगी। यह गौरव का क्षण है कि सचिन ने देश की रक्षा में अपना बलिदान दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार ने सचिन की शहादत पर उनके माता -पिता के खाते में 50 लाख रुपये की अनुग्रह धनराशि दी है। इसके अलावा के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी तथा शहीद के गांव में शहीद गेट के निर्माण आदि की प्रक्रिया स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से की जा रही है।

 

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