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नाना साहेब ने किए थे अंग्रेजों के दांत खट्टे

इगलास। परोपकार सामाजिक सेवा संस्था द्वारा गांव तोछीगढ़ में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नेतृत्वकर्ता व शिल्पकार महान क्रांतिकारी नाना साहेब की 199वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं ने नाना साहेब के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर माँ भारती के सच्चे सपूत को श्रद्धांजलि दी।

संस्था के अध्यक्ष जतन चौधरी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में नाना साहब ने कानपुर में अंग्रेजों के विरद्ध युद्ध का नेतृत्व किया था। जब मेरठ में क्रांति का बिगुल बजा तो नाना साहब ने बड़ी ही वीरता और दक्षता से क्रांति की सेनाओं का नेतृत्व किया। नाना साहब ने कानपुर में अंग्रेजी फौज को एक महीने कैद करके रखा था। नाना साहब, पेशवा बाजीराव द्वितीय के वंशज थे जो बाद में बिठूर के राजा बने थे जो कि अंग्रेजों को कतई पसंद नहीं था। अंग्रेज बिठूर को अपने कब्जे में रखना चाहते थे और ये बात नाना साहब को पसंद नहीं थी। नाना साहब ने पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा कर पेशवा की उपाधि धारण की। नाना साहब का अदम्य साहस कभी भी कम नहीं हुआ और उन्होंने क्रांतिकारी सेनाओं का बराबर नेतृत्व किया। इस युद्ध में कभी क्रांतिकारी जीते तो कभी अंग्रेज।नाना साहब ने महाराणा प्रताप की भाँति आजीवन अनेक कष्ट सहे परंतु उन्होंने फिरंगियों के संमुख आत्मसमर्पण नहीं किया। अंग्रेज सरकार ने नाना साहब को पकड़वाने के लिए बड़े-बड़े इनाम भी घोषित किए थे किन्तु वे सदैव निष्फल ही रहे।

सचमुच नाना साहब का त्याग एवं स्वातंत्र्य, उनकी वीरता और सैनिक योग्यता उन्हें भारतीय इतिहास के एक प्रमुख व्यक्ति के आसन पर बिठा देती है। नाना साहेब और उनके सेनापति महान क्रांतिकारी तात्या टोपे ने कानपुर में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिये थे। स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के विरद्ध उन्होने, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का भी भरपूर साथ दिया था। इस अवसर पर छोटू चौधरी, लखन चौधरी, वंश भारद्वाज, आकाश, अंकित, चिंटू, अमन, धर्मवीर सिंह, धीरज चौधरी, सौरभ गौतम, आदित्य कुमार, साधना, सूरज आदि मुख्यरूप से मौजूद रहे।

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