अलीगढ़ में गांव सहारा खुर्द बनेगा शिव आस्था का केंद्र
- श्री चंद्रमौलेश्वर पातालेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट करा रहा मंदिर का जीर्णाेद्धार
अलीगढ़। तहसील क्षेत्र के गांव सहारा खुर्द-पाताल खेड़िया को हिंदू आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। गांव में स्थित प्राचीन कुमारेश्वर मंदिर, प्रतिज्ञेश्वर मंदिर और कपिलेश्वर मंदिर को आपस में जोड़कर भव्य कारिडोर का निर्माण शुरु हो गया है। मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान से शिलाएं पहुंच रही हैं।
मंदिर जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्य श्री चंद्रमौलेश्वर पातालेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट द्वारा कराया जा रहा है। 26 सितंबर को कुमारेश्वर मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए भूमि पूजन किया गया था। जिसमें श्री गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कॉरिडोर निर्माण के लिए राजस्थान से तराशे गए पत्थर मंदिर परिसर में पहुंचने लगे हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारी व एमएलसी ऋषिपाल सिंह ने बताया कि तीनों मंदिरों को जोड़ने वाले परिक्रमा मार्ग पर सीसी कार्य के साथ भव्य द्वारा का निर्माण जारी है। भक्तों के विश्राम के लिए एक हाल का निर्माण पूर्ण हो चुका है। अलीगढ़-मथुरा रोड से मंदिर तक जाने वाली लिंक मार्ग के दोनों साइड़ दो-दो मीटर इंटरलाकिंग कराई जा रही है। मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा। यह कॉरिडोर न केवल तीनों प्राचीन मंदिरों को जोड़ने का कार्य करेगा, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा। इससे क्षेत्र की धार्मिक पहचान और अधिक सशक्त होगी। वहीं प्रधान प्रतिनिधि संजय चौधरी ने कहा कि मंदिर जीर्णोद्वार से गांव के विकास को नई दिशा मिलेगी। श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।

भगवान कार्तिकेय ने स्थापित किए थे शिवलिंग
इगलास क्षेत्र में जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर अलीगढ़-मथुरा मार्ग पर गांव सहारा खुर्द और पाताल खेडिया के मध्य स्थित प्राचीन गुप्ततीर्थ स्थल है।
मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय ने यहीं पर ताड़कासुर का वध किया था। ताड़कासुर भगवान शिव का परम भक्त था। कार्तिकेय ने प्रायश्चित स्वरूप देव शिल्पी विश्वकर्मा से तीन विशुद्ध शिवलिंगों का निर्माण कराया। इसके बाद यहां कुमारेश्वर, प्रतिज्ञेश्वर और कपालेश्वर नाम से तीन शिवलिंगों की स्थापना की गई। इस स्थल का उल्लेख शिवपुराण, स्कंदपुराण, भागवत पुराण तथा विश्वकर्मा पुराण में मिलता है। कहा जाता है कि एक श्राप के कारण यह स्थान लंबे समय तक गुप्त रहा, इसी कारण इसे “गुप्ततीर्थ” कहा जाता है। यहां स्थापित तीनों शिवलिंग स्वयंभू माने जाते हैं। मंदिर परिसर के समीप स्थित पार्वती सरोवर है। यहां स्थित बै माता का मंदिर संपूर्ण भारत में अपनी तरह का एकमात्र मंदिर माना जाता है।