– बराह क्षेत्र नेपाल में एक अरब हनुमान नाम जप 17 अप्रैल से
अलीगढ़। नेपाल के सनातन समाज को सबसे बड़ा खतरा चीन से नहीं पश्चिमी देशों से है, क्योंकि नेपाल की भौगोलिक दखल से वे चीन और भारत दोनों पर नजर रख सकते हैं, इसके लिए नेपाल में गरीब हिंदुओं का बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। यह बात बराह क्षेत्र चतरा धाम नेपाल से आए जगतगुरू श्रीमज्जगद्गुरू रामानन्दाचार्य पद समलंकृत स्वामी श्री रामकृष्णाचार्य महायोगीसिद्धबाबा महाराजश्री ने स्थानीय होटल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहीं। वे श्री अखलेश्वर महादेव मंदिर रघुवीरपुरी में आयोजित श्री रामकथा महायज्ञ में भाग लेने के लिए आए हुए थे।
उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध है, लेकिन पश्चिमी शक्तियाँ नहीं चाहती हैं कि विश्व में सनातन की ध्वजा लहराए, इसलिए यह शक्तियाँ नेपाल के गरीबी वाले क्षेत्रों में अन्नदान, शिक्षा, चिकित्सा आदि के नाम पर भोलेभाले लोगों को बहलाकर धर्म परिवर्तन करा रही हैं। इन लोगों ने ईसा मसीह को भगवा रंग में रंग दिया है ताकि लोग जल्द ही भ्रमित हों।
ऐसे में भारत के हिंदू समाज को चाहिए कि वे नेपाल की धार्मिक स्थलों को सुदृढ़ बनाने के लिए आगे आएँ, वहां उद्योग धंधे स्थापित करें। उन्होंने नेपाल के कम्युनिस्ट लोगों को दोगला बताते हुए कहा कि यह लोग बार-बार चीन का नाम लेकर भारत को ब्लैकमेल करते हैं, जबकि न तो नेपाल से चीन का सांस्कृतिक रिश्ता है, न सामाजिक और न ही भौगोलिक। नेपाल के तराई क्षेत्र में आईएसआई सक्रिय हैं। सीमित क्षेत्र में दस हजार मदरसे खुल गए हैं। यहां से हिंदू विरोधी गतिविधियाँ जारी हैं।
उन्होंने बताया कि विश्व का कल्याण केवल सनातन ही कर सकता है। वैदिक पद्धति से जीवन जीना प्रकृति के नजदीक लाता है। सनातन पद्धति से जीने वाला नर से नारायण बनने की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने बताया कि हिमालय ही संसार की उत्पत्ति का कारक है। कोसी नदी के किनारे बराह क्षेत्र में आठ अरब वर्ष पूर्व भगवान बराह ने रसातल से पृथ्वी को निकाला था। बराह भगवान की दांत में कुशा का एक तिनका फंसा था, तब उन्होंने ब्रह्माजी को आदेश दिया कि आप प्रलय के बाद सृष्टि का निर्माण करें, तब ब्रह्माजी ने नेपाल के इसी क्षेत्र से सृष्टि का निर्माण प्रारम्भ किया।
कोशी नदी के कारण यहां से प्रथम ऋषि कौशिक हुए। इसी वंश में ऋंगी ऋषि थे, जिन्होंने दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था, जिसके कारण भगवान राम सहित चारों भाइयों का प्रादुर्भाव हुआ। जगतगुरु ने कहा कि बराह क्षेत्र चतरा धाम में 19 अप्रैल से एक अरब हनुमान नाम जप शुरू होगा, जिसमें देश-विदेश के सैकड़ों साधु-संत भाग लेंगे। इस मौके पर श्री अखलेश महादेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सतीश गौड़ और प्रवीण अग्रवाल आदि मौजूद रहे।