कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की झांकी देख भावविभोर हुए श्रद्धालु, बराती बन जमकर थिरके
गभाना। गांव करनपुर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन कथा पंडाल में भक्ति, भाव और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। कथा व्यास मनु व्यास ने अपनी सुमधुर वाणी से जैसे ही भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का मार्मिक और जीवंत प्रसंग सुनाया तो पूरा परिसर ‘जय श्री कृष्णा’ और ‘राधे-राधे’ के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
कथाव्यास ने कहा कि सांसारिक सुख-दुख तो धूप-छांव की तरह आते-जाते रहते हैं, इस मायारूपी संसार के बंधनों और कष्टों से मुक्ति का एकमात्र मार्ग केवल और केवल प्रभु की अविरल भक्ति है। जब जीवात्मा संसार के सारे झूठे आश्रयों को छोड़कर पूरी तरह निश्छल और निष्काम भाव से परमात्मा की शरण में शरणागत हो जाती है, तब सर्वेश्वर श्री कृष्ण स्वयं दौड़कर आते हैं और उसका हाथ थामकर भवसागर से पार लगा देते हैं। भक्ति में छल-कपट का कोई स्थान नहीं है, भगवान केवल भाव के भूखे हैं।
प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने माता रुक्मिणी के अनन्य प्रेम का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विदर्भ राजकन्या रुक्मिणी ने बिना देखे ही केवल नारायण के गुणों को सुनकर उन्हें मन ही मन अपना सर्वस्व मान लिया था। परंतु उनके भाई रुक्मी ने अहंकारवश उनका विवाह जबरन शिशुपाल से तय कर दिया। संकट की उस घड़ी में रुक्मिणी जी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से द्वारकाधीश को अत्यंत भावुक और आर्त पुकार भरा पत्र भेजा। अपनी अनन्य भक्त के हृदय की व्याकुलता को भांपकर अंतर्यामी प्रभु तुरंत रथ पर सवार होकर विदर्भ नगरी पहुंचे और राक्षसी प्रवृत्ति के राजाओं के बीच से रुक्मिणी का हरण कर उन्हें द्वारका ले आए, जहां वैदिक रीति-रिवाज से दोनों का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ।
कथा के दौरान जैसे ही पंडाल में भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी के अलौकिक विवाह की सजीव झांकी प्रस्तुत की गई तो पूरे पंडाल पर पुष्पवर्षा होने लगी। इस दिव्य विवाह उत्सव में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाए और भगवान की बरात के अनूठे बराती बनकर पारंपरिक भजनों व मंगल गीतों पर जमकर झूमे। महिलाओं ने मंगल गाकर माहौल को पूरी तरह उत्सवमयी बना दिया।
आयोजन में मुनेश वासिक प्रधान, नारायण सिंह, सोनू वासिक, अजय रावत, कोमल गुप्ता, अमित, करूआ, गुलवीर, शिवा बासिक, कृष्ण रावत, राजन रावत, रमेश राघव, रामबीर राघव और बुधप्रकाश शर्मा सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग व श्रद्धालु उपस्थित रहे।